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जिस MBBS रिजल्ट के लिए 15 साल किया इंतजार, अंत में दो विषयों में हो गया फेल, चर्चा में यूपी का मेडिकल छात्र

जिस MBBS रिजल्ट के लिए 15 साल किया इंतजार, अंत में दो विषयों में हो गया फेल, चर्चा में यूपी का मेडिकल छात्र

उत्तर प्रदेश में एक बड़ा ही अजीबोगरीब और दिलचस्प मामला सामने आया है. यहां गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास यानी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन छात्र 15-20 साल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. ये छात्र 1998, 2009 और 2010 बैच के हैं और बार-बार फेल होने और प्रक्रियात्मक देरी की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए हैं. यह मामला तब दुनिया के सामने आया, जब 2010 बैच के एक छात्र ने अपने एमबीबीएस रिजल्ट के लिए लगभग 15 साल इंतजार किया और फिर हाईकोर्ट का रुख किया. उसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार उसका रिजल्ट जारी किया गया और सबसे हैरानी की बात ये रही कि छात्र दो विषयों में फेल हो गया. कोर्ट ने अब उसे सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है. इस मामले ने हर किसी को चौंका दिया है.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा, ‘सप्लीमेंट्री परीक्षा की प्रक्रिया चल रही है और 10-15 दिनों में पूरी हो जाएगी. हमने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया है कि 1998 और 2009 बैच के छात्रों के रिजल्ट उसी तरह जारी किए जाएं जैसे हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं, ताकि वो भी सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल हो सकें’.

कितने साल में MBBS पास करना जरूरी?

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मौजूदा नियमों के मुताबिक, एमबीबीएस के छात्रों को फर्स्ट ईयर की परीक्षा चार प्रयासों में पास करनी होती है और 4.5 साल के शैक्षणिक पाठ्यक्रम और एक साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप सहित पूरे कोर्स को 5.5 से 6 सालों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है. हालांकि एक छात्र अधिकतम 10 साल तक पास होने का प्रयास कर सकता है, लेकिन उसके बाद रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाता है.

रिजल्ट जारी करने में क्यों हुई देरी?

हालांकि प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण तीनों बीआरडी छात्रों ने पास होने की अधिकतम समय-सीमा को पार कर लिया है. उनकी फाइनल ईयर की परीक्षाएं साल 2024 में आयोजित की जानी थीं, लेकिन यूनिवर्सिटी द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन के दिशानिर्देशों के इंतजार के कारण रिजल्ट में देरी हुई. पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के तहत कोई सख्त समय-सीमा नहीं थी, लेकिन नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों में अब पात्रता समय-सीमा का स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है. ऐसे में प्रशासन को एनएमसी से स्पष्टीकरण लेना पड़ा, जिससे छात्रों के रिजल्ट जारी करने में और देरी हुई.

डॉ. जायसवाल ने आगे कहा, ‘एनएमसी द्वारा 2023 में जारी किए गए दिशानिर्देश मौजूदा छात्रों के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन पुराने बैचों के लिए यह स्पष्ट नहीं था कि किन नियमों का पालन किया जाए. ऐसे में अदालत के आदेश के बाद विश्वविद्यालय को प्रभावित छात्रों के रिजल्ट जारी करने और उनके लिए सप्लीमेंट्री परीक्षाओं की अनुमति देने का निर्देश दिया गया है’.

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