News

बरेली: ठंड में शराब समझ पी लिया मेथनॉल, टैंकर के केबिन में ड्राइवर-कंडक्टर की मौत; असम से उत्तराखंड जा रहे थे

बरेली: ठंड में शराब समझ पी लिया मेथनॉल, टैंकर के केबिन में ड्राइवर-कंडक्टर की मौत; असम से उत्तराखंड जा रहे थे

उत्तर प्रदेश के बरेली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर फरीदपुर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक घटना सामने आई. यहां सड़क किनारे खड़े एक कैंटर के केबिन में चालक और कंडक्टर की लाशें मिलने से हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही फरीदपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शुरुआती जांच में सामने आया कि दोनों की मौत मेथनॉल नामक जहरीले नशीले पदार्थ के सेवन से हुई है.

मृतकों की पहचान दिल्ली के प्रेम नगर निवासी चालक पुष्पेंद्र और अंबेडकर नगर निवासी कंडक्टर सुरेंद्र के रूप में हुई. दोनों असम से मेथनॉल भरकर एक कैंटर में उत्तराखंड के रुद्रपुर जा रहे थे. रास्ते में उन्होंने फरीदपुर टोल प्लाजा के पास गाड़ी रोकी और केबिन के अंदर ही खाना बनाया. इसी दौरान यह हादसा हुआ.

केबिन में मिला खाना और बोतलें, जांच में जुटी पुलिस

फरीदपुर इंस्पेक्टर राधेश्याम ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि दोनों ने खाने के दौरान मेथनॉल और किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन किया. पुलिस को कैंटर के केबिन से खाना, बर्तन और कुछ बोतलें मिली हैं. आशंका है कि ठंड ज्यादा होने के कारण दोनों ने शराब समझकर या नशे के लिए मेथनॉल पी लिया, जो बेहद जहरीला होता है.

पुलिस, फॉरेंसिक और सर्विलांस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की. केबिन से मिली बोतलों को जांच के लिए भेज दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मेथनॉल का सेवन करने से कुछ ही समय में हालत बिगड़ जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है.

बेसुध हालत में मिले ड्राइवर और कंडक्टर

घटना का पता उस समय चला, जब कोहरे के कारण सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाने के लिए पुलिस गश्त कर रही थी. पुलिस ने कैंटर को काफी देर तक आवाज दी, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया. शक होने पर पुलिस ने केबिन का दरवाजा खोलकर देखा तो दोनों अंदर बेसुध हालत में पड़े थे. तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी. फिलहाल पुलिस इसे लापरवाही और जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई मौत मानकर जांच कर रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर लंबे रूट के चालक-कंडक्टर ठंड और थकान से बचने के लिए कई बार गलत कदम उठा लेते हैं. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खतरनाक रसायनों की ढुलाई में लगे कर्मचारियों को पर्याप्त जानकारी और सावधानी क्यों नहीं दी जाती?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *