दिल्ली की सड़कों से भी ज्यादा जहरीली घरों में किचन की हवा, चौंका देगी IIT की ये स्टडी

Delhi Pollution Research Story: अगर आप सोचते हैं कि घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद करके आप दिल्ली के जहरीले प्रदूषण से सुरक्षित हैं, तो आप गलत हो सकते हैं. एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि दिल्ली के कई घरों के किचन में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कई गुना ज्यादा है. यह इनडोर पॉल्यूशन न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि गंभीर बीमारियों का कारण भी बन रहा है.
रिसर्च में पाया गया कि घर के अंदर प्रदूषण का ग्राफ खाना बनाते समय, खासकर सुबह और रात के वक्त अचानक तेजी से ऊपर जाता है. हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक महीन कण खाना पकाने के दौरान तेजी से फैलते हैं.
प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजहें
छोटे और बंद किचन में धुएं के बाहर निकलने का रास्ता न होना. कई घरों में चिमनी या एग्जॉस्ट फैन का न होना या उनका प्रभावी न होना. घर में अगरबत्ती जलाना और झाड़ू-सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल.
अमीर हो या गरीब, कोई भी सुरक्षित नहीं
हैरानी की बात यह है कि यह समस्या केवल कम आय वाले छोटे घरों तक सीमित नहीं है. स्टडी के अनुसार, बड़े और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों में भी इनडोर पॉल्यूशन का स्तर काफी अधिक मिला. कई घरों की हवा में 70 से 80% तक बहुत छोटे कण पाए गए, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं.
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किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
रिसर्च टीम ने आगाह किया है कि इस इनडोर पॉल्यूशन का सबसे बुरा असर तीन वर्गों पर पड़ रहा है. महिलाएं, जो रसोई में सबसे ज्यादा समय बिताती हैं. बुजुर्ग, जो अपना अधिकांश समय घर के अंदर ही रहते हैं. बच्चे:, जिनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे हैं, उनके लिए यह प्रदूषण भविष्य में दिल और सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है.
बचाव के लिए क्या करें? विशेषज्ञों की सलाह
शोधकर्ताओं ने सरकार और आम जनता दोनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. खाना बनाते समय खिड़कियां खुली रखें और एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें. सरकार कम आय वाले परिवारों के लिए बेहतर वेंटिलेशन और स्वच्छ ईंधन के सस्ते विकल्प उपलब्ध कराए. लोग यह समझें कि केवल बाहरी हवा ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की हवा को साफ रखना भी जान बचाने के लिए जरूरी है.