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53 साल और 3,600+ बाघ… International Tiger Day पर जानें प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता की कहानी, लेकिन अब कौन सी चुनौतियां आ रहीं सामने?

53 साल और 3,600+ बाघ… International Tiger Day पर जानें प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता की कहानी, लेकिन अब कौन सी चुनौतियां आ रहीं सामने?

Ramnagar News: 29 जुलाई का दिन केवल बाघों के संरक्षण का संदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की समीक्षा का भी अवसर है कि बाघों को बचाने के प्रयास कितने सफल रहे और भविष्य में कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हैं. करीब 1,288 वर्ग किलोमीटर में फैला कॉर्बेट टाइगर रिजर्व बाघों के सर्वाधिक घनत्व के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. यहां का प्राकृतिक आवास, भरपूर जल स्रोत और समृद्ध जैव विविधता बाघों के लिए सबसे अनुकूल माहौल प्रदान करती है.

देश और कॉर्बेट में कैसे बढ़ी बाघों की आबादी?

साल 1973 में जब देश में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत हुई थी, तब भारत में मात्र 1,411 बाघ दर्ज किए गए थे. साल 2010 में देश में बाघों की संख्या 1,706 थी, जो 2014 में 2,226, 2018 में 2,967 और 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना में बढ़कर 3,682 तक पहुंच गई. वर्तमान में भारत में 58 टाइगर रिजर्व हैं.

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कॉर्बेट में साल 2006 में लगभग 150 बाघ थे, जो 2010 में 184 और 2014 में 215 हुए. 2022 की गणना के अनुसार कॉर्बेट के भीतर 260 से अधिक बाघ मौजूद हैं, जबकि आसपास के लैंडस्केप को मिलाकर यह आंकड़ा 300 के पार पहुंच जाता है.

बाघों के संरक्षण से बदला स्थानीय अर्थशास्त्र

बाघों की बढ़ती आबादी का सीधा फायदा स्थानीय लोगों को रोजगार के रूप में मिला है. बाघों की दीद के लिए देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटकों के कारण जिप्सी चालक, जिप्सी मालिक, नेचर गाइड, नेचुरलिस्ट, होटल, रिजॉर्ट और होमस्टे कारोबारियों को भारी लाभ मिला है. कॉर्बेट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिमान सिंह के अनुसार, अब लोग वन्यजीवों की गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देते हैं और संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.

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विशेषज्ञों की राय और उभरती चुनौतियां

वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों ने बाघ संरक्षण की इस यात्रा के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला है. वन्यजीव प्रेमी संजय छिम्मवाल और नेचुरलिस्ट दीप मलकानी का कहना है कि सीमित क्षेत्र में बाघों की बढ़ती संख्या से वन संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में बाघों के प्राकृतिक आवास का विस्तार और उन्हें अन्य सुरक्षित वन क्षेत्रों से जोड़ना बेहद जरूरी है ताकि आनुवंशिक विविधता बनी रहे.

मानव-वन्यजीव संघर्ष और कूड़ा प्रबंधन

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, बढ़ती बाघ आबादी के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकना, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच टिकाऊ पर्यटन बनाए रखना और कचरा प्रबंधन सबसे मुख्य चुनौतियां बनकर उभरी हैं.

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