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होली के दिन ASI के मर्डर से दहल उठा था मुंगेर, अब 8 दोषियों को उम्रकैद… तीन महिलाएं भी शामिल; जानें पूरा मामला

होली के दिन ASI के मर्डर से दहल उठा था मुंगेर, अब 8 दोषियों को उम्रकैद… तीन महिलाएं भी शामिल; जानें पूरा मामला

Munger Court Verdict ASI Murder Case: मुंगेर की एक अदालत ने मुफस्सिल थाना के एएसआई संतोष कुमार सिंह की पीट-पीटकर की गई हत्या के सनसनीखेज मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए तीन महिलाओं समेत कुल आठ अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई.

इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न चुकाने की स्थिति में अभियुक्तों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत पांच साल की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी. मुंगेर के नंदलालपुर में होली के दिन 14 मार्च 2025 को डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) संतोष कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी. त्योहार के दिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से संतोष कुमार सिंह दो गुटों के बीच हो रहे हिंसक विवाद को सुलझाने और मामला शांत कराने पहुंचे थे.

पुलिस अधिकारी पर अचानक जानलेवा हमला किया

उसी दौरान उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया और उन्हें बेरहमी से पीटा. इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एएसआई को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. लोक अभियोजक के अनुसार, इस हत्याकांड की सबसे खास बात यह रही कि सजा पाने वाले सभी आठों अभियुक्त राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी एक ही परिवार के सदस्य हैं.

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्पीडी ट्रायल के तहत रखा था. पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और अभियोजन पक्ष द्वारा गवाहों को समय पर कोर्ट में प्रस्तुत करने के कारण ही इस केस का फैसला बेहद तेजी से आ सका. शहीद एएसआई संतोष कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के कैमूर जिले के मोहनियां थाना क्षेत्र अंतर्गत पीपरिया गांव के रहने वाले थे.

दिवंगत पुलिस अधिकारी के परिवार को न्याय

कोर्ट द्वारा 24 अगस्त को ही इन सभी आरोपियों को दोषी करार दे दिया गया था और सोमवार को सजा का ऐलान होने के बाद कड़े सुरक्षा घेरे में सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया. त्वरित न्याय के इस फैसले से जहां दिवंगत पुलिस अधिकारी के परिवार को न्याय मिला है, वहीं कानून का उल्लंघन करने वालों के बीच एक कड़ा संदेश भी गया है.

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