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पटना: Google पर बैंक की जगह ठगों का नंबर! 1 हटाकर बनाया फर्जी कस्टमर केयर, कैसे खाते से उड़ाए करोड़ों रुपये?

पटना: Google पर बैंक की जगह ठगों का नंबर! 1 हटाकर बनाया फर्जी कस्टमर केयर, कैसे खाते से उड़ाए करोड़ों रुपये?

पटना में साइबर अपराधियों ने बैंक के कस्टमर केयर नंबर के नाम पर लोगों को ठगने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसमें ग्राहक खुद साइबर ठगों के जाल में पहुंच जाते थे. आरोपी बैंक के असली कस्टमर केयर नंबर से मिलता-जुलता फर्जी नंबर तैयार कर उसे इंटरनेट पर इस तरह प्रचारित करते थे कि ग्राहक उसे बैंक का आधिकारिक नंबर समझकर कॉल कर देते थे. इसके बाद बैंक अधिकारी बनकर गोपनीय जानकारी हासिल करने और खातों से करोड़ों की ठगी का आरोप है.

पटना साइबर थाना और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, जांच में अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का पता चला है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रतोष कुमार, गुड्डू कुमार, अंशु कुमार और विक्की कुमार के रूप में हुई है. चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

असली नंबर से मिलता-जुलता नंबर बनाते थे

पुलिस के मुताबिक, गिरोह बैंक के 11 अंकों वाले कस्टमर केयर नंबर को निशाना बनाता था. नंबर के शुरुआती अंक 1 को हटाकर उससे मिलता-जुलता 10 अंकों का मोबाइल नंबर तैयार किया जाता था. उदाहरण के तौर पर 18605005555 के स्थान पर 8605005555 और 18604195555 की जगह 8604195555 जैसे नंबर इस्तेमाल किए गए.

इन नंबरों में मामूली अंतर होने के कारण ग्राहक आसानी से धोखा खा जाते थे. आरोपी इन नंबरों को बैंक के आधिकारिक नंबर के तौर पर इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करते थे.

Google पर भी फर्जी नंबर दिखाने की कोशिश

जांच में सामने आया कि गिरोह केवल फर्जी नंबर तैयार करने तक सीमित नहीं था. आरोपी Google Business Profile और Google Maps पर बैंक की शाखाओं और एटीएम से जुड़ी जानकारी में बदलाव कराने की कोशिश करते थे, ताकि बैंक का कस्टमर केयर नंबर खोजने पर उनका नंबर सामने आए.

इसके अलावा Google पर विज्ञापन के जरिए भी फर्जी नंबर को ऊपर दिखाने की कोशिश की जाती थी. ग्राहक बैंकिंग समस्या के समाधान के लिए खुद कॉल करता और ठग उसे बैंक कर्मचारी बनकर बातों में फंसा लेते थे.

OTP और बैंकिंग जानकारी लेकर उड़ाते थे रकम

आरोपी क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने या बिजली बिल अपडेट करने जैसे बहाने बनाते थे. इसके बाद ग्राहकों से गोपनीय बैंकिंग जानकारी और OTP हासिल करने का आरोप है. इसी जानकारी के जरिए खातों से रकम निकाल ली जाती थी.

पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबरों के संबंध में NCRP पर 385 शिकायतें मिली हैं. इससे गिरोह के बड़े नेटवर्क की आशंका सामने आई है.

एक शिकायत से गिरफ्तारी तक पहुंची पुलिस

एक बैंक ग्राहक से हुई साइबर ठगी की शिकायत के बाद पुलिस ने संदिग्ध नंबरों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया. जांच में एक नंबर की लोकेशन पटना के कंकड़बाग इलाके में मिली, जहां से प्रतोष कुमार को पकड़ा गया. उसकी निशानदेही पर नालंदा से गुड्डू और अंशु तथा फिर कंकड़बाग से विक्की कुमार को गिरफ्तार किया गया.

पुलिस के मुताबिक, विक्की फर्जी और हूबहू मिलते-जुलते मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता था. आरोपियों के पास से पांच मोबाइल, पांच सिम, एक चेकबुक और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

टेलीकॉम कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपियों को ऐसे विशेष नंबर कैसे मिलते थे. टेलीकॉम स्टोर स्तर पर संपर्क और कुछ कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है. गिरोह से जुड़े ठिकानों के पटना, नालंदा, गया और शेखपुरा में होने की बात सामने आई है.

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक का कस्टमर केयर नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से सत्यापित करें. किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, CVV, कार्ड PIN या पासवर्ड साझा न करें. साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें.

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