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रक्षा सहयोग से हिन्द महासागर तक… 5 दिन तक भारत में अमेरिका का ये बड़ा अधिकारी, क्या-क्या होगी बात?

रक्षा सहयोग से हिन्द महासागर तक… 5 दिन तक भारत में अमेरिका का ये  बड़ा अधिकारी, क्या-क्या होगी बात?

यूएस पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस यात्रा का मकसद भारत-अमेरिका Major Defense Partnership को आगे बढ़ाना और दोनों सेनाओं के बीच सहयोग मजबूत करना है. इस दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, उभरती तकनीक और रणनीतिक स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर उच्चस्तरीय चर्चा होगी.

जानकारी के मुताबिक एडमिरल पापारो भारतीय समकक्षों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे. बातचीत में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नई उभरती तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा. इसके साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना भी चर्चा का अहम मुद्दा होगा. भारत आने पर एडमिरल पापारो का जोरदार स्वागत किया गया.

समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक में सैन्य सहयोग

दोनों पक्ष Defence Energy Resilience यानी रक्षा क्षेत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन पर भी बात करेंगे. तेजी से बदल रहे Technology Landscape और बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. Emerging Technologies से Maritime Security तक, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर रहेगा. एडमिरल पापारो का दौरा Indian Ocean Region में अमेरिकी मौजूदगी और हितों की निरंतरता को भी रेखांकित करता. इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक में सैन्य सहयोग रहेगा.

ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ सहयोग

भारत के लिहाज से इस दौरे का खास महत्व है. इससे नई सैन्य तकनीक, समुद्री डोमेन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ सहयोग आगे बढ़ेगा. उभरती प्रौद्योगिकी से लेकर समुद्री सुरक्षा तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रक्षा साझेदारी का निर्माण कर रहे हैं. एडमिरल पापारो की यात्रा प्रमुख रक्षा साझेदारी की मजबूती को रेखांकित करती है और हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थायी उपस्थिति और हितों की पुष्टि करती है.

एडमिरल पापारो आज दुनिया की सबसे विशाल सैन्य कमान की अगुवाई कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में करीब 4 लाख सैन्य और असैन्य कर्मी, 5 एयरक्राफ्ट कैरियर, लगभग 200 युद्धपोत और 1,000 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात हैं.

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