News

Ujjain Maha Ashtami: उज्जैन में 2100 साल पुरानी नगर पूजा शुरू, महाअष्टमी पर मदिरा की धार से हुआ अनुष्ठान

Ujjain Maha Ashtami: उज्जैन में 2100 साल पुरानी नगर पूजा शुरू, महाअष्टमी पर मदिरा की धार से हुआ अनुष्ठान

Ujjain Maha Ashtami 2026: शारदीय नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. इन दिनों देशभर के मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, हवन और कन्या पूजन की तैयारियां होती हैं. इस बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाअष्टमी के अवसर पर 2100 साल पुरानी ऐतिहासिक नगर पूजा की परंपरा निभाई जा रही है. सम्राट विक्रमादित्य के समय से चली आ रही इस परंपरा में देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा अर्पित की जाती है. मान्यता है कि इस पूजा से नगर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं उज्जैन की इस अनोखी नगर पूजा की परंपरा और इसका धार्मिक महत्व.

मदिरा की धार के साथ शुरू हुई नगर पूजा

उज्जैन में सोमवार सुबह 8 बजे चौबीस खंबा माता मंदिर में माता महामाया और महालया को मदिरा का भोग अर्पित करके नगर पूजा की शुरुआत की गई. कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई. इसके बाद सरकारी अधिकारियों और कोटवारों का दल शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए रवाना हुआ.

इस पारंपरिक नगर पूजा के दौरान करीब 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर स्थित 40 से अधिक मंदिरों में अनुष्ठान किया जाता है. इस आयोजन में 25 लीटर से अधिक मदिरा का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है. पूजा के दौरान स्थानीय परंपराओं के अनुसार सात्विक और तामसिक, दोनों तरह की पूजन पद्धतियों का पालन किया जाता है.

देवी-भैरव को मदिरा, हनुमान मंदिरों में चढ़ता है नारियल-सिंदूर

चौबीस खंबा माता मंदिर के पुजारी महेश गुरु के मुताबिक, नगर पूजा के दौरान देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा के साथ दही, पूड़ी, भजिए और भीगे हुए गेहूं-चने यानी घूघरी का भोग लगाया जाता है. वहीं, हनुमान मंदिरों में नारियल, तेल, सिंदूर और ध्वज अर्पित करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अनुष्ठान के जरिए नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति मिलती है. माना जाता है कि इससे वे प्रसन्न होती हैं और नगरवासियों को सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.

सम्राट विक्रमादित्य के समय से चली आ रही है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उज्जैन की नगर पूजा की परंपरा करीब 2100 साल पुरानी है. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में हुई थी. समय के साथ यह परंपरा सिंधिया स्टेट के दौर में भी जारी रही. आजादी के बाद से प्रदेश शासन और प्रशासन की ओर से इसका निर्वहन किया जाता रहा है.

इस नगर पूजा का खर्च शासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से वहन किया जाता है. उज्जैन की ये परंपरा आज भी शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *