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LPG Gas ship: कैप्टन सुखमीत और कैप्टन धीरज…युद्ध क्षेत्र को चीरते हुए भारत तक एलपीजी गैस पहुंचाने वाले ये हैं दो असली धुरंधर

LPG Gas ship: कैप्टन सुखमीत और कैप्टन धीरज…युद्ध क्षेत्र को चीरते हुए भारत तक एलपीजी गैस पहुंचाने वाले ये हैं दो असली धुरंधर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करते हुए भारत के दो जहाज हिंदुस्तान की सरजमीं पर आ चुके हैं. इनके नाम शिवालिक और नंदा देवी हैं. दोनों जहाज LPG टैंकर लेकर आए हैं. इन दोनों जहाज को लाने वाले कैप्टन सुखमीत और कैप्टन धीरज हैं. सुखमीत जहां शिवालिक के कैप्टन थे तो धीरज नंदा देवी के कैप्टन थे.

सुखमीत सिंह और धीरज कुमार अग्रवाल ने दुनिया भर के महासागरों का सफर तय किया है, लेकिन मर्चेंट नेवी कमांडर के तौर पर उनकी असली परीक्षा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अशांत जलक्षेत्र में हुई. यह इलाका आमतौर पर तेल और गैस के व्यापार का एक शांत मार्ग माना जाता है, लेकिन अब ड्रोन, मिसाइलों और बारूदी सुरंगों के साये में आ गया है.

धैर्य और अनुभव का साथ…

उनका मकसद दो विशाल भारतीय LPG गैस टैंकरों को युद्ध ग्रस्त रास्ते से सुरक्षित रूप से निकालना था. धैर्य और अनुभव उनके साथ था. शिवालिक सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा. वहीं, नंदा देवी मंगलवार तड़के कांडला बंदरगाह पहुंचा. इस तरह उसने एक मुश्किल सफर पूरा किया.

क्रू ने होर्मुज से सुरक्षित गुजरने के लिए भारतीय नौसेना का शुक्रिया अदा किया. जहाजों पर सवार नाविकों से मिले अधिकारियों ने बताया कि क्रू को एकमात्र समस्या लंबे इंतज़ार की हुई. अधिकारियों ने कहा कि वे फिर से यात्रा के लिए तैयार होंगे, क्योंकि उनमें से ज़्यादातर लोग पहले भी इस होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं.

शिपिंग सचिव विजय कुमार ने कहा कि नाविकों ने दुनिया के सबसे अहम संकरे रास्तों में से एक पर अनिश्चितता के बीच भी अपनी ड्यूटी जारी रखी. ठीक उस समय, जब जहाज़ों पर हमलों के कारण आवाजाही कम हो गई थी.

सुखमीत और धीरज को जानिए

सुखमीत पंजाब के आदमपुर के रहने वाले हैं. उनके परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने सुखमीत को ड्यूटी छोड़ने की सलाह दी थी, लेकिन सुखमीत ने कहा था कि वह काम पूरा करने के बाद ही घर लौटेंगे, क्योंकि भारत में ज़रूरी सामान वापस लाना उनकी ज़िम्मेदारी थी.

अधिकारियों ने बताया कि धीरज ओडिशा के बालांगीर में कांटाबांजी के रहने वाले हैं. उनके परिवार वालों ने कहा कि नंदा देवी के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली.

जहाजरानी मंत्रालय की नाविकों के साथ बातचीत से जुड़े एक सवाल के जवाब में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि इसका मकसद उन्हें धन्यवाद देना और उनकी बेहतरीन सेवा की सराहना करना था. उन्होंने कहा, वे सभी अपनी वर्दी में थे और स्वस्थ तथा खुश नज़र आ रहे थे. सिन्हा ने बताया कि लगभग 3.2 लाख भारतीय नाविक हैं और उनमें से 90% विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं, जो उनकी काबिलियत को दर्शाता है.

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