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क्या सैन्य अधिकारियों की पत्नियां सोशल मीडिया पर नहीं शेयर कर सकतीं हर जानकारी? केस दर्ज होने के बाद उठे सवाल

क्या सैन्य अधिकारियों की पत्नियां सोशल मीडिया पर नहीं शेयर कर सकतीं हर जानकारी? केस दर्ज होने के बाद उठे सवाल

जम्मू-कश्मीर में सेना के एक अधिकारी की पत्नी के खिलाफ विदेशी खुफिया एजेंटों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है. इस घटना के बाद सैन्य कर्मियों और उनके परिवारों के लिए सोशल मीडिया पॉलिसी पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि सैन्य अधिकारियों पर कड़े नियम लागू होते हैं, लेकिन क्या उनके परिवार के सदस्यों पर भी वही पाबंदियां लागू होती हैं?

दरअसल, सेना में सेवारत जवानों और अधिकारियों को सोशल मीडिया पर यूनिफॉर्म में फोटो या ऐसी इमेज पोस्ट करने पर सख्ती से रोक लगाई गई, जिनसे लोकेशन का पता चल सके. उन्हें ऑफिशियल फंक्शन की फोटो या वीडियो भी ऑनलाइन पोस्ट करने से मनाही है. लेकिन यही पाबंदियां उनके परिवार के सदस्यों पर लागू नहीं होता है. यही वजह है कि सेना के सोशल मीडिया पॉलिसी पर सवाल उठ रहे हैं.

सेना के नियम अधिकारियों के पत्नी पर लागू नहीं

द ट्रिब्यून के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि सेना के अधिकारियों की पत्नी पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के केस दर्ज किया जा सकता है, जैसा कि किसी भी आम लोगों पर लागू होता है. हालांकि, सेना के अधिकारियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बनाए गए सेवा नियमों को उनकी पत्नी पर लागू नहीं किया जा सकता. उनका कहना है कि आर्मी एक्ट जीवनसाथी पर लागू नहीं होता है, इसलिए, सेवा नियमों के तहत बनाई गई पाबंदियां उन पर नहीं लगाई जा सकतीं.

जम्मू-कश्मीर में सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उनपरचीनी और अन्य विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में रहने और संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप हैं. इससे पहले ही ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब राष्ट्रीय सुरक्षा के जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने के गंभीर मामले सामने आए थे.

2019 में नेवी के 7 लोगों को किया गया गिरफ्तार

पिछले एक दशक में, ऐसे जासूसी के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर 2019 में, नेवी के सात लोगों को एक जासूसी रैकेट में गिरफ्तार किया गया था. इन नौसैनिकों को पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसाया गया था. उन्होंने भारत के युद्धपोतों, पनडुब्बियों की लोकेशन और नेवल बेस की बेहद संवेदनशील जानकारियां पैसों और अन्य लालच के बदले लीक की थीं.

ऐसे ही मामले में एक वायुसेना अधिकारी पर ऑनलाइन संपर्क किए जाने के बाद सैन्य अभियान से जुड़ा मटीरियल ISI को लीक करने का आरोप लगा था. वहीं, इस साल मई में, एक और IAF ऑफिसर को कथित तौर पर एक महिला द्वारा लालच दिए जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसके ISI से संबंध होने का शक था.

परिवार को समय-समय पर किया जाता है जागरूक

हाल के सालों में सेना ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए सख्त नियम बनाए हैं.साथ ही उनके जीवनसाथी, बच्चों और परिवार के अन्य लोगों से भी इन पाबंदियों और इन-हाउस वाइव्स एंड फैमिली वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के जरिए संभावित ऑनलाइन सुरक्षा खतरों के बारे में जागरूक करने की कोशिश की जाती है. हालांकि, परिवार के सदस्यों पर सेवा नियमों को सीधे लागू नहीं किया जा सकता.

सेना ने पहले भी परिवार के लोगों को जागरूक करने के लिए एडवाइजरी जारी की हैं. 2017 में वेतन और फर्जी लेटर से जुड़ी अफवाहें ऑनलाइन फैलने के बाद सेना में सेवारत कर्मचारियों के पत्नी और परिवार के सदस्यों को एक एडवाइजरी जारी की गई थी. वहीं, 2019 में परिवार के सदस्यों से सोशल मीडिया से यूनिफॉर्म में अधिकारियों की फोटो हटाने के लिए कहा गया था.

रक्षा मंत्रालय समेत तीनों सेनाओं के हेडक्वार्टर में फोन बैन

आर्मी के अलावा, नेवी और वायुसेना की सोशल मीडिया पॉलिसी भी एक समान हैं. दिसंबर 2019 के एक आदेश में नेवी ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के द्वारा फेसबुक के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था. साथ ही वॉरशिप, डॉकयार्ड और बेस पर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. इसने मैसेजिंग, कंटेंट-शेयरिंग और इसी तरह के ऐप्स के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी.

इसी तरह रक्षा मंत्रालय में भी कर्मचारियों को स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने पर बैन है. साथ ही, आर्मी, IAF और नेवी के ऑपरेशनल एरिया के अलावा, तीनों सेनाओं के हेडक्वार्टर में भी मोबाइल फोन की अनुमति नहीं है.

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