जरा भी शर्म है तो अब दे दें इस्तीफा… जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद CEC ज्ञानेश कुमार को विपक्ष ने फिर घेरा

SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक तरफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की एक टिप्पणी ने इस मुद्दे को और हवा दे दी है, जिससे विपक्ष के हमले और तेज हो गए हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के प्रमुख के तौर पर ज्ञानेश कुमार का काम करना देश के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित होता है कि CEC ने संविधान का उल्लंघन किया है.
Here is the bold Justice Ujjal Bhuyan speaking yesterday in NALSAR University in Hyderabad where he exposed the CEC lock, stock and barrel. If he has any sense of shame Gyanesh Kumar must quit right away. His ability to execute G2s illegal orders have now made him a liability for the country.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 5, 2026
‘CEC की पोल-पट्टी खोलकर रख दी’
अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा ‘हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में कल जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने बेबाकी से अपनी बात रखी और CEC की पोल-पट्टी खोलकर रख दी. अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म-लिहाज है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. G2 के गैर-कानूनी आदेशों को लागू करने की उनकी क्षमता ने उन्हें अब देश के लिए एक बोझ बना दिया है’.
‘तो मैं जेल जाने को भी तैयार हूं…’
इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘मैं भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाने पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज उज्ज्वल भुइयां को बधाई देता हूं. CJI साहब, अब आपके करियर में खोने के लिए कुछ नहीं है, सिवाय शायद रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों के. अगर आपको बुरा लगे तो कृपया मुझे माफ़ करें, लेकिन अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि मैं अदालत की अवमानना कर रहा हूं, तो मैं जेल जाने को भी तैयार हूं’.
I Congratulate Hon Ujjal Bhuyan sitting Judge of Supreme Court for taking up the Cause of the Citizens Rights for a Free and Fair Elections to save Democracy in India.
Hon CJI Sahab Supreme Court Your Lordship, you have nothing to lose in your Career now except maybe Post Retirement Benefits. Please forgive me if you feel offended but I am prepared to go to Jail if Hon Supreme Court feels I am committing Contempt of Court.
I have been in Public Life since 1972 and in State and Central Legislatures since 1977 and CM MP for 10 years my respect for Judiciary. You can check up with living Retired Chief Justices of MP from 1993-2003 but I have never seen such One Sided Atrocities against Citizens Rights being committed by @ECISVEEP. Shame on you Mr Gyanesh Kumar. You must Resign. Dont be so SHAMELESS. History would never FORGIVE YOU.
@INCIndia @kharge @RahulGandhi @priyankagandhi @KapilSibal @VTankha @DrAMSinghvi @Jairam_Ramesh @Pawankhera
जय सिया राम।— Office Of Digvijaya Singh (@OfficeOfDVS) October 5, 2026
ज्ञानेश कुमार पर दिग्विजय सिंह का तीखा वार
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा ‘मैं 1972 से सार्वजनिक जीवन में हूं और 1977 से राज्य और केंद्रीय विधानसभाओं/संसद का सदस्य रहा हूं. न्यायपालिका के प्रति मेरा हमेशा सम्मान रहा है. आप 1993-2003 के बीच मध्य प्रदेश के रहे रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीशों से पूछ सकते हैं, लेकिन मैंने कभी भी @ECISVEEP द्वारा नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ इतनी एकतरफा ज्यादती होते नहीं देखी. मिस्टर ज्ञानेश कुमार, आपको शर्म आनी चाहिए. आपको इस्तीफा दे देना चाहिए. इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा.जय सिया राम’.
सागरिका घोष ने भी साधा निशाना
वहीं टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी पर अपना रिएक्शन दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा ‘अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों-करोड़ों भारतीय नागरिक अपने अधिकारों से वंचित हो जाते हैं और अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाते हैं, तो ऐसी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है. इसे किसी भी तरह के तर्क या लेकिन-मगर से सही नहीं ठहराया जा सकता.यह संविधान की मूल भावना पर प्रहार है’.
If any process results in disenfranchising millions and millions of Indian citizens — making them second-class citizens in their own country — such a process is intrinsically arbitrary.. No amount of whataboutery can justify it.. strikes at the very heart of the Constitution : Justice Ujwal Bhuyan of the Supreme Court. A Supreme Court judge has now spelt out CEC Gyanesh Kumars CRIME. Will the conscience of the other justices of the apex court now also awaken to the brazen injustices of the SIR? And still the shameless Gyanesh Kumar, puppet of Gujarati Jodi No. 1 keeps clinging to his chair.
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) October 5, 2026
घोष ने आगे कहा ‘सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने अब CEC ज्ञानेश कुमार के अपराध को स्पष्ट कर दिया है. क्या अब शीर्ष अदालत के अन्य जजों की अंतरात्मा भी इस घोर अन्याय के खिलाफ जागेगी?. फिर भी, ‘गुजराती जोड़ी नंबर 1′ की कठपुतली, बेशर्म ज्ञानेश कुमार अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं’.
जस्टिस भुइयां ने क्या कहा था
दरअसल जस्टिस भुइयां ने कहा था कि किसी भी तरह की दलीलें वोटिंग का अधिकार छीनने को सही नहीं ठहरा सकतीं हैं. संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले वोटिंग के अधिकार से कोई भी छेड़छाड़ नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया मनमानी है, जो लाखों भारतीयों को वोटिंग के अधिकार से रोकती है. इसे कोई भी बहाना सही नहीं ठहरा सकता.ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है. जस्टिस भुइयां रविवार (4 अक्टूबर) को हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
