जानिए कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 नए जज? सीनियर महिला वकील वी मोहाना की नियुक्ति को भी मंजूरी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के लिए पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. इनमें चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं. सोमवार (1 जून) को कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी. आइये जानते हैं कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के पांच नए जज.
हाल ही में केंद्र सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी. नई नियुक्तियों के बाद अब शीर्ष अदालत में 38 में से 37 पद भर चुके हैं, जिससे लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है. इन नियुक्तियों की सिफारिश पिछले सप्ताह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी.
इन पांच लोगों के नाम शामिल
जिन पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है, उनमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली के साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं.
जस्टिस शील नागू
1 जनवरी 1965 को जन्मे जस्टिस शील नागू मूल रूप से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जुड़े रहे हैं. सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति से पहले, जस्टिस शील नागू ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया.उन्होंने 1987 में वकालत शुरू की और सिविल, संवैधानिक तथा सेवा संबंधी मामलों में विशेषज्ञता हासिल की. साल 2011 में उन्हें मध्य प्रदेशहाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया था और 2013 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया. जुलाई 2024 में उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.
मध्य प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस नागू ने पर्यावरण संरक्षण, निजता के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं. वह जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े चर्चित कैश एट रेजिडेंस मामले की जांच करने वाली आंतरिक समिति का भी हिस्सा रहे थे. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2029 तक रहेगा.
जस्टिस श्री चंद्रशेखर
जस्टिस चंद्रशेखर बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं. रांची में जन्मे चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 1993 में वकालत शुरू की. 2013 में वह झारखंड हाईकोर्ट के जज बने और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए.
उन्होंने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले, मालेगांव विस्फोट मामले और मुंबई के वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है. चंद्रशेखर की नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि झारखंड का फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था चंद्रशेखर मई 2030 में सेवानिवृत्त होंगे.
जस्टिस संजीव सचदेवा
जस्टिस संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं. सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और कैंपस लॉ सेंटर से स्नातक किया. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट से अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी.
उन्हें अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और मार्च 2015 में वे स्थायी न्यायाधीश बन गए. उनका तबादला 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुआ और बाद में उन्होंने जुलाई 2025 में इसके मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.
सचदेवा ने इससे पहले दो दशकों से अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील के रूप में कार्य किया और न्यायपालिका में मानव संसाधन विकास से संबंधित राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली उप-समिति का नेतृत्व भी किया. सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल लगभग साढ़े तीन साल का होगा.
जस्टिस अरुण पल्ली
जस्टिस अरुण पल्ली पल्ली जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं.18 सितंबर, 1964 को पटियाला में जन्मे पल्ली ने 1988 में पंजाब विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयों में वकालत की. उन्होंने 2004 से 2007 के बीच पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में कार्य किया और 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया.
उन्हें दिसंबर 2013 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और बाद में उन्होंने अप्रैल 2025 में जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट केके मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. उन्होंने हरियाणा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और लंबे समय से लंबित विवादों को सुलझाने के उद्देश्य से कई मध्यस्थता और लोक अदालत की पहलों की देखरेख की. सर्वोच्च न्यायालय में उनका कार्यकाल तीन साल से थोड़ा अधिक होगा.
वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना
इन नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की हो रही है. मोहना जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद 2018 में बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने वाली भारत के इतिहास में दूसरी महिला बन गई हैं.जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के साथ वह सुप्रीम कोर्ट की दो कार्यरत महिला न्यायाधीशों में से एक होंगी.
कोयंबटूर में हुआ जन्म
27 जून, 1966 को जन्मीं मोहना कोयंबटूर की रहने वाली हैं और उन्होंने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया , 1996 में सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनीं और 2015 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया.
दिलचस्प बात यह है कि वह सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जस्टिस केवी विश्वनाथन की सहपाठी थीं और उन्होंने भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के कार्यालय में उनके साथ काम भी किया था. वह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण मामलों में पेश हो चुकी हैं, जिनमें सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार और कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध मामले से संबंधित मुकदमे शामिल हैं.
करीब पांच साल का होगा कार्यकाल
उनकी नियुक्ति से वह सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में 12वीं महिला न्यायाधीश बन जाएंगी. चूंकि उन्हें सीधे वकालत के पेशे से पदोन्नत किया जा रहा है, इसलिए उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत लंबा यानी लगभग पांच साल का होगा और वह जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी.