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जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान, फिर भी नहीं थमा घमासान, स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट जारी

जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान, फिर भी नहीं थमा घमासान, स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट जारी

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में करीब 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा की गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे. हालांकि, प्रशासन के इस फैसले से आंदोलन कर रहे छात्र संतुष्ट नहीं हैं. छात्रों का कहना है कि आदेश में संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है. इसके अलावा, प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी कोई फैसला नहीं लिया गया है. ऐसे में छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है.

20 साल बाद छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे. वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय का छात्र संघ भंग कर दिया गया था. तब से छात्र निर्वाचित छात्र संघ बहाली की मांग कर रहे हैं.

सुबह प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले रजिस्ट्रार

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने प्रशासन की ओर से जारी आदेश छात्रों के साथ साझा किया. उन्होंने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील भी की. रजिस्ट्रार का कहना था कि प्रशासन ने छात्रों की मांगों को स्वीकार कर लिया है. हालांकि, छात्रों ने इस आदेश को पर्याप्त नहीं माना और अपनी आपत्तियां सामने रखीं.

चुनाव की तारीख स्पष्ट नहीं होने पर नाराजगी

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इसकी प्रक्रिया कब शुरू होगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया है. आदेश में केवल इतना कहा गया है कि संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव होंगे. संविधान को मंजूरी देने की तारीख तय नहीं होने के कारण छात्रों को चुनाव की समयसीमा पर संदेह है.

प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग भी बरकरार

छात्रों ने प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि आंदोलन केवल छात्र संघ चुनाव कराने के लिए नहीं, बल्कि परिसर में लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी है.

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेता तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. ऐसे में चुनाव कराने की घोषणा के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.

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