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देश के बड़े बंदरगाहों का मालिक कौन? 5 साल में हुई 26 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई

देश के बड़े बंदरगाहों का मालिक कौन? 5 साल में हुई 26 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई

देश के बड़े बंदरगाहों से हर साल हजारों करोड़ रुपये की कमाई होती है. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर इन बंदरगाहों का मालिक कौन है? क्या इन्हें निजी कंपनियों को बेच दिया गया है या फिर इन पर अब भी सरकार का नियंत्रण है? संसद में सरकार ने इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी है. सरकार ने साफ किया है कि देश के 12 बड़े बंदरगाह पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन हैं. पिछले पांच सालों में इन बंदरगाहों की कमाई लगातार बढ़ी है और वित्त वर्ष 2025-26 में इनसे 26,582 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ.

कई टर्मिनलों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर हो रहा है, लेकिन बंदरगाहों का मालिकाना हक सरकार के पास ही है. राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि चेन्नई, कोचीन, दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू, कामराजर, मुरमुगाओ, मुंबई, न्यू मैंगलोर, पारादीप, स्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीओ चिदंबरनार और विशाखापत्तनम सहित सभी 12 बड़े बंदरगाह केंद्र सरकार के अधीन हैं.

इनमें कामराजर पोर्ट चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है. जबकि बाकी 11 बंदरगाह मेजर पोर्ट अथॉरिटीज एक्ट, 2021 के तहत संचालित होते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 10 सालों में किसी भी बड़े बंदरगाह का निजीकरण नहीं किया गया है. जमीन और मुख्य बंदरगाह परिसंपत्तियों का स्वामित्व आज भी संबंधित पोर्ट अथॉरिटी और भारत सरकार के पास ही है.

  • देश के सभी 12 बड़े बंदरगाह केंद्र सरकार के स्वामित्व में हैं.
  • पिछले 10 सालों में किसी भी बड़े बंदरगाह का निजीकरण नहीं हुआ.
  • 2025-26 में बड़े बंदरगाहों से 26,582.77 करोड़ रुपये का राजस्व मिला.
  • कई टर्मिनल PPP मॉडल पर विकसित किए गए, लेकिन मालिकाना हक सरकार के पास है.

कौन-कौन से हैं देश के 12 बड़े बंदरगाह?

सरकार के अनुसार देश के 12 प्रमुख बंदरगाह हैं- चेन्नई पोर्ट, कोचीन पोर्ट, दीनदयाल पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPA), कामराजर पोर्ट, मुरमुगाओ पोर्ट, मुंबई पोर्ट, न्यू मैंगलोर पोर्ट, पारादीप पोर्ट, स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट और विशाखापत्तनम पोर्ट. इन बंदरगाहों का संचालन संबंधित पोर्ट अथॉरिटी करती है, जबकि सरकार नीतिगत और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखती है.

क्या बंदरगाहों का निजीकरण हुआ?

सरकार ने संसद में साफ कहा कि पिछले 10 सालों में किसी भी बड़े बंदरगाह का निजीकरण नहीं किया गया है. हां, कई टर्मिनल और बर्थ PPP मॉडल के तहत विकसित किए गए हैं. इसका मतलब है कि निजी कंपनियां कुछ टर्मिनलों का निर्माण, संचालन और रखरखाव करती हैं, लेकिन बंदरगाह की जमीन और मुख्य परिसंपत्तियां सरकार के पास ही रहती हैं. यह काम खुली और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाता है.

India Major Ports Revenue

26 हजार करोड़ की कमाई (Getty Image)

किन बंदरगाहों में PPP मॉडल पर काम हुआ?

सरकार के अनुसार पिछले 10 सालों में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, पारादीप पोर्ट, विशाखापत्तनम पोर्ट, स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, मुंबई पोर्ट, दीनदयाल पोर्ट, मुरमुगाओ पोर्ट, वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट और अन्य प्रमुख बंदरगाहों में कई टर्मिनल PPP मॉडल पर विकसित किए गए हैं. वहीं चेन्नई और कोचीन पोर्ट में इस अवधि के दौरान कोई नया PPP टर्मिनल विकसित नहीं किया गया.

क्रमांक बंदरगाह 2021-22 (Cr) 2022-23(Cr) 2023-24(Cr) 2024-25 (Cr) 2025-26 (Cr)
1. दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी 2,140.59 3,142.59 3,104.23 3,140.51 3,437.25
2. मुंबई पोर्ट अथॉरिटी 1,979.37 2,295.00 2,557.52 2,830.83 3,318.74
3. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी 2,681.14 2,895.11 3,149.18 3,918.84 4,356.34
4. मुरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी 457.66 486.00 585.87 563.16 607.95
5. न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी 743.26 882.73 1,013.58 1,102.98 1,121.88
6. कोचीन पोर्ट अथॉरिटी 759.12 827.24 964.43 998.73 1,091.15
7. वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी 654.53 820.49 1,121.91 1,205.72 1,254.96
8. चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी 1,164.97 1,357.20 1,369.08 1,552.27 1,516.47
9. कामराजर पोर्ट लिमिटेड 850.82 1,009.22 1,081.44 1,160.19 1,272.13
10. विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी 1,609.86 1,862.10 2,334.18 2,448.87 2,585.85
11. पारादीप पोर्ट अथॉरिटी 1,895.73 2,255.22 2,658.18 2,756.86 2,893.62
12. स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी 2,734.44 2,985.48 3,419.46 3,169.08 3,126.43
17,671.49 20,818.38 23,359.06 24,848.03 26,582.77

पांच साल में कितनी हुई कमाई?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में देश के बड़े बंदरगाहों की कमाई लगातार बढ़ी है. वित्त वर्ष 2021-22 में इन बंदरगाहों से 17,671.49 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो 2022-23 में बढ़कर 20,818.38 करोड़ रुपये हो गया. इसके बाद 2023-24 में यह बढ़कर 23,359.06 करोड़ रुपये और 2024-25 में 24,848.03 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, 2025-26 में बड़े बंदरगाहों ने 26,582.77 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले पांच सालों में सबसे अधिक है.

पोर्टवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने 4,356.34 करोड़ रुपये के साथ सबसे ज्यादा कमाई की. इसके बाद दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी ने 3,437.25 करोड़ रुपये, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने 3,318.74 करोड़ रुपये और स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी ने 3,126.43 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया.

सरकार आगे क्या करेगी?

सरकार ने कहा कि वह ‘लैंडलॉर्ड पोर्ट मॉडल’ को बढ़ावा देती रहेगी. यानी बंदरगाहों का स्वामित्व सरकार के पास रहेगा, जबकि जरूरत के मुताबिक निजी क्षेत्र को टर्मिनलों के विकास, संचालन और आधुनिकीकरण में भागीदारी दी जाएगी. इससे क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया कि सभी PPP परियोजनाएं पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए ही दी जाएंगी, ताकि सार्वजनिक हित सुरक्षित रहे.

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