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30 लाख का कर्ज, पक्के घर की उम्मीद और वो आखिरी परांठा… साकेत बिल्डिंग हादसे ने छीन लिए 3 होनहार बेटे, Inside Story

30 लाख का कर्ज, पक्के घर की उम्मीद और वो आखिरी परांठा… साकेत बिल्डिंग हादसे ने छीन लिए 3 होनहार बेटे, Inside Story

Saket News: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के तरबगंज के रहने वाले 26 वर्षीय रवि का सपना एक कामयाब डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना था. उनके किसान पिता ने अपनी हैसियत से बाहर जाकर, कर्ज लेकर करीब 30 लाख रुपये खर्च किए ताकि बेटा डॉक्टर बन सके. रवि ने किर्गिस्तान की जलाल-अबाद स्टेट यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी की थी.

अगस्त 2024 में भारत लौटने के बाद वह 28 जून को होने वाली विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा (FMGE) की तैयारी में दिन-रात जुटा हुआ था. पहले प्रयास में असफल होने के बाद रवि इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था. दोस्तों के मुताबिक, वह देर रात तक पढ़ता था क्योंकि उसे परिवार पर चढ़े कर्ज की फिक्र थी. उसे उम्मीद थी कि वह डॉक्टर बनकर माता-पिता की गरीबी दूर करेगा, लेकिन परीक्षा से कुछ दिन पहले आए इस काल ने सब कुछ खत्म कर दिया.

आलोक के मोबाइल की घंटी रात 11 बजे तक बजती रही

इसी मलबे ने सिविल इंजीनियर आलोक वर्मा के रूप में एक और उभरते हुए सितारे को हमेशा के लिए बुझा दिया. आलोक भी इसी इमारत में स्थित एक कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे. हादसे के बाद जब उनके दोस्तों को घटना का पता चला, तो वे पूरी रात आलोक के मोबाइल पर कॉल करते रहे.

एक दोस्त ने रुंधे गले से बताया, “शनिवार रात 11 बजे तक आलोक का फोन लगातार बज रहा था. हमें लगा कि वह मलबे में कहीं सुरक्षित होगा और फोन उठाएगा… कहेगा कि मैं ठीक हूं. लेकिन 11 बजे के बाद फोन हमेशा के लिए बंद हो गया.” आलोक की मौत से उनके सहपाठियों और दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है.

माता-पिता के लिए ‘पक्का घर’ बनाना चाहते थे नलिन

बिहार के नवादा के रहने वाले नलिन का सफर भी इस हादसे के साथ खत्म हो गया. इंजीनियरिंग करने के बाद वह भारतीय रेलवे में अधिकारी बनने का ख्वाब लेकर दिल्ली आए थे. परिवार में सबसे छोटे और लाडले नलिन अक्सर कहते थे कि नौकरी लगते ही वह सबसे पहले माता-पिता के लिए एक खूबसूरत पक्का घर बनवाएंगे.

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हादसे से चंद मिनट पहले वह अपने दोस्त के साथ कैंटीन में पराठा खा रहे थे. उनके दोस्त ने बताया कि वह सिर्फ दही लेने के लिए बाहर निकला था, तभी एक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग धूल के गुबार में बदल गई. रविवार सुबह जब मलबे से नलिन का शव निकाला गया, तो उस बूढ़े मां-बाप के पक्के घर का सपना भी हमेशा के लिए टूट गया.

एमसीडी ने दो अधिकारियों को किया सस्पेंड

साकेत मेट्रो स्टेशन के पास वेस्टर्न मार्ग (गली नंबर-5) में हुए इस भयावह हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया है. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शुरुआती जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है. दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर ने जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग विभाग) अमन जैन को काम में लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है. इसके साथ ही असिस्टेंट इंजीनियर सुदेश सिंह चौहान को भी प्रभावी निगरानी न रखने और ढिलाई के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. एमसीडी का कहना है कि दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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