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नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई में आरोपियों ने ही चल दिया दांव, CBI अब क्या करेगी?

नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई में आरोपियों ने ही चल दिया दांव, CBI अब क्या करेगी?

देशभर में पेपर लीक के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को अब तुरंत और सख्त सजा होगी. इसके लिए चार हाई कोर्ट (बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश) को चुना गया और कहा गया कि इन अदालतों में पेपर लीक मामले की सुनवाई होगी.

पेपर लीक मामले की पहली सुनाई 27 जुलाई को दिल्ली के फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी थी. मगर उस दिन सुनवाई ही नहीं हुई क्योंकि सीबीआई की तरफ से कोर्ट में कोई नहीं पहुंचा था. इसके चलते पहले दिन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना पड़ा. इससे पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज अनु ग्रोवर बालीगा का भी तबादला कर दिया गया. इसके बाद जज अजय गुप्ता को इसकी (फास्ट ट्रैक कोर्ट) कमान सौंपी गई.

पहली सुनवाई में आरोपियों ने चला बड़ा दांव

कार्यभार संभालने के बाद अजय गुप्ता ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में रोजाना सुनवाई की जाएगी. इस मामले में चार अगस्त को फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई हुई. इस दौरान आरोपियों ने बड़ा दांव चल दिया. आरोपियों ने खुद का पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने की मांग की है. आरोपियों के वकील वकील एपी सिंह ने कोर्ट में इसकी अर्जी दी.

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपियों (मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल) की इस मांग पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने जांच एजेंसी से ये भी पूछा है कि कानूनी तौर पर यह आवेदन कितना सही है. हालांकि, कानूनी तौर पर आरोपी खुद को बेगुनाह साबित करने या जांच को नई दिशा देने के लिए इस तरह की मांग कर सकते हैं.

क्या होता है लाई डिटेक्टर टेस्ट?

लाई डिटेक्टर टेस्ट एक ऐसा टेस्ट है, जो यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि कोई व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ. हालांकि, यह मशीन सीधे तौर पर झूठ को नहीं पकड़ती, बल्कि झूठ बोलते समय शरीर में होने वाले साइकोलॉजिकल चेंज को मापती है. दरअसल, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठ बोलता है, तो तनाव और डर के कारण उसका सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिससे उसके शरीर की सामान्य गतिविधियां बदल जाती हैं. जांच के दौरान व्यक्ति के शरीर पर कई संवेदनशील सेंसर और उपकरण लगाए जाते हैं. हालांकि, अगर इसकी ऑथेंटिसिटी पर बात करें तो यह टेस्ट 100 फीसदी सटीक नहीं होता है. इसकी सटीकता को लेकर हमेशा विवाद रहता है.

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने CBI से क्या कहा?

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह कल यानी बुधवार शाम तक चार्जशीट की जांच पूरी कर ले. साथ ही 6 अगस्त तक सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दे दे. अभी चार्जशीट पर विचार होना बाकी है. दो आरोपियों (दिनेश बिवाल और विकास बिवाल) की जमानत याचिकाओं की सुनवाई भी 6 अगस्त तक टाल दी गई है. उनके वकील वकील एपी सिंह ने चार्जशीट की कॉपी मांगी थी.

20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

29 जुलाई को कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट के साथ दाखिल सूची के मुताबिक दस्तावेज, बयान और सामान जमा नहीं किए गए हैं. वहीं, सीबीआई के वकील ने बताया कि चार्जशीट और दस्तावेज करीब 20 हजार पन्नों के हैं. इनकी स्कैनिंग चल रही है. इसलिए समय लग रहा है, क्योंकि 13 आरोपियों को ये दस्तावेज देने हैं. जज अनु ग्रोवर बालिगा ने पहले 3 दिन का समय दिया था और 3 अगस्त की तारीख तय की थी. अब यह तारीख 6 अगस्त कर दी गई है. सीबीआई ने पहले ही 13 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है. इसमें 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक सामान का जिक्र है. फिलहाल सभी 13 आरोपी जेल में हैं.

सीबीआई ने 12 मई 2026 को इस मामलें में FIR दर्ज की थी. 72 अधिकारियों और 8 साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की कई टीमें गठित कीं. महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी. इस मामले में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के 3 एनटीए विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं. आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिया गया है.

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