जब करोड़पति था… तो पत्नी और 4 बच्चों को नहीं दी फूटी कोड़ी; फिर ऐसे पलटी कहानी, अब मौत के बाद लावारिसों की तरह हुआ अंतिम संस्कार

Etah News: पैसों का लालच और रिश्तों की बेरुखी किस तरह इंसान को बुढ़ापे में अकेला छोड़ देती है, इसकी एक दिल दहला देने वाली मिसाल एटा जिले से सामने आई है. कभी तीन से चार करोड़ रुपये की जायदाद और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार के मालिक रहे 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की शनिवार को सैफई मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई. पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद राजकुमार का शव सैफई की मोर्चरी में 72 घंटे तक लावारिस पड़ा रहा. जब पुलिस ने परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने शव लेने और अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया. अंततः ‘रक्तदाता समूह’ की टीम आगे आई और शनिवार को यमुना तट पर विधि-विधान से वृद्ध का अंतिम संस्कार किया.
एटा के मारहरा क्षेत्र के रहने वाले राजकुमार सक्सेना की करीब 20 साल पहले अपने क्षेत्र में बहुत धाक थी. उनके पास 3 से 4 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी और उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी दुकान थी. हालांकि, जब कारोबार ठीक नहीं चला तो परिवार में पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया. राजकुमार ने अपनी पत्नी आशा और चारों बच्चों को संपत्ति में से एक फूटी कौड़ी नहीं दी. इससे आहत होकर पत्नी आशा अपने चारों बच्चों को लेकर गाजियाबाद के नंदग्राम में रहने चली गईं और राजकुमार से सारे रिश्ते खत्म कर लिए.
करोड़ों की जायदाद बेची, कर्जदार होकर पहुंचे वृद्धाश्रम
परिवार के जाने के बाद राजकुमार अकेले पड़ गए. राजकुमार ने धीरे-धीरे अपनी करोड़ों की संपत्ति बेच डाली. जब संपत्ति खत्म हो गई तो वे परिचितों और रिश्तेदारों से उधार लेकर जीवन चलाने लगे. उन पर करीब 4 से 5 लाख रुपये का कर्ज भी चढ़ गया. पिछले 5 सालों से राजकुमार एटा के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. 16 जुलाई को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें एटा वृद्धाश्रम से सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 11 अगस्त को उनकी सांसें थम गईं.
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बेटे ने फोन पर कहा- हमारा कोई मतलब नहीं, घर पर मिला ताला
सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. मनोज मौर्य ने बताया कि भर्ती के समय लिखवाए गए नंबर पर राजकुमार के बेटे से बात कर उसकी फोन पर काउंसिलिंग की गई. लेकिन बेटे ने पिता की मौत की बात सुनकर शव का अंतिम संस्कार करने से साफ मना कर दिया. पत्नी आशा का कहना था कि 20 साल पहले ही उनका रिश्ता खत्म हो चुका है. रक्तदाता समूह के सदस्य शरद तिवारी ने बताया कि उनकी टीम गाजियाबाद के नंदग्राम स्थित राजकुमार के बेटे के मकान पर भी पहुंची ताकि उन्हें मना सकें, लेकिन 11 अगस्त से ही उनके घर पर ताला लटका मिला.
रक्तदाता समूह ने निभाया इंसानियत का फर्ज
सैफई मोर्चरी में 72 घंटे पूरे होने के बाद सैफई थाना पुलिस के सहयोग से रक्तदाता समूह के सदस्यों ने पहल की. शरद तिवारी और उनकी टीम के सदस्यों ने वृद्ध के शव को सम्मानपूर्वक ले जाकर यमुना तट पर हिंदू रीति-रिवाज के साथ मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार संपन्न कराया.
