हूती बाब अल मंडेब को बंद करने से कितने दूर हैं?

लाल सागर में बढ़ता तनाव अब उस मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां इसका असर सिर्फ यमन या मिडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं रहेगा. अब हूती दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने के करीब पहुंचते हुए दिख रहे हैं. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, यमन के हूती आंदोलन यानी अंसार अल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने अल-ओमारी गैरीसन पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है.
अल-ओमारी गैरीसन की बात करें, तो यह सैन्य अड्डा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा से जुड़े इलाकों में स्थित है. अगर हूतियों का यह दावा सही साबित होता है, तो लाल सागर के इस अहम हिस्से में उनकी सैन्य पकड़ पहले के मुकाबले मजबूत हो सकती है. इतना ही नहीं, हूतियों ने यह भी दावा किया है कि उनकी नौसेना ने लाल सागर में स्थित ढाकर द्वीप पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया है.
बाब अल-मंडेब के बेहद करीब हूती
उनके मुताबिक, द्वीप को विरोधी बलों से मुक्त करा लिया गया है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यमनी सरकार की ओर से तत्काल कोई ऑफिशियल रिएक्शन सामने आया है. हाल के दिनों में पश्चिमी यमन के तटीय इलाकों में भारी लड़ाई और हूतियों की बढ़त की खबरों ने चिंता बढ़ाई है.
हूती विद्रोही यमन के रणनीतिक लाल सागर तट पर आगे बढ़कर बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. हालिया सैन्य बढ़त के बाद हूती लड़ाके इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग और उससे लगे मोचा (Mocha) शहर पर कब्जा कर लिया है.
हूतियों के लिए कितना दूर बाब अल-मंडेब?
मोचा पर कब्जा करने के बाद वे दक्षिण की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं, पेरिम द्वीप जो मोचा से लगभग 50 मील दक्षिण में स्थित है और तटवर्ती शहर धुबाब (Dhubab) अब हूतियों के मुख्य सैन्य निशाने पर हैं. अगर हूती इस पर कब्जा कर लेता है तो कहा जा सकता है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जोखिम पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है. फिलहाल हूती बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से मात्र 75 किलोमीटर या उससे भी कम दूरी पर हैं.
क्यों अहम है बाब अल-मंडेब?
बाब अल-मंडेब की अहमियत को समझना जरूरी है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है. एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में बाधा आने का मतलब वैश्विक सप्लाई चेन, तेल परिवहन और माल ढुलाई पर सीधा दबाव हो सकता है.
