Indian Railways: ट्रेनों में खराब पार्ट्स लगाने वाली कंपनियों की खैर नहीं, रेलवे ने बनाया ये तगड़ा प्लान

Indian Railways: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है. बीते कुछ समय में ट्रेनों में तकनीकी खराबी के कई मामले सामने आए थे. जब रेलवे के अधिकारियों ने इन खराबियों की जांच की, तो एक बड़ी परेशानी सामने आई. ट्रेन के खराब हुए पुर्जों (पार्ट्स) पर उन्हें बनाने वाली कंपनियों का नाम या बैच नंबर साफ-साफ नहीं लिखा था. इस वजह से ये तय करना मुश्किल हो रहा था कि घटिया क्वालिटी का सामान किस वेंडर ने सप्लाई किया है. इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए रेलवे ने अब पुर्जों की वॉरंटी व मार्किंग को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है.
बिना पहचान वाले पुर्जों ने बढ़ाई टेंशन
हाल ही में उपकरणों के फेल होने की कई घटनाएं हुईं, जिनमें जांच के दौरान पता चला कि पार्ट्स पर जरूरी मार्किंग या तो अधूरी थी, या फिर उसे पढ़ना नामुमकिन था. रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्किंग साफ न होने की वजह से पार्ट्स की ट्रेसेबिलिटी प्रभावित हो रही थी. इससे ये साबित करना मुश्किल हो जाता था कि खराबी के लिए कौन सी कंपनी जिम्मेदार है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए रेलवे डिजाइन व मानक संगठन (RDSO) ने सभी जोनल रेलवे, वैगन निर्माताओं व निरीक्षण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं.
कंपनियों को माननी होगी ये खास शर्त
अब रेलवे को सप्लाई किए जाने वाले हर पुर्जे पर निर्माता का नाम, कोड, सीरियल नंबर, बैच नंबर, बनने का महीना व साल लिखना अनिवार्य होगा. सिर्फ इतना ही नहीं, मार्किंग की जगह, उसका आकार, गहराई व तरीका पूरी तरह से RDSO के मानकों के हिसाब से होना चाहिए. रेलवे अब सिर्फ ये नहीं देखेगा कि पुर्जे पर जानकारी लिखी है या नहीं. अब ये भी चेक किया जाएगा कि मार्किंग पूरी, सही व आसानी से पढ़ी जाने लायक है या नहीं.
इन जरूरी पार्ट्स पर रहेगी कड़ी नजर
जिन पुर्जों की चेकिंग सबसे ज्यादा सख्ती से होगी, उनमें कपलर, ड्राफ्ट गियर, ब्रेक ब्लॉक, कंप्रेस्ड-एयर ब्रेक उपकरण, स्प्रिंग, साइड बियरर, एडॉप्टर, ब्रेक बीम, बोगी व वियर प्लेट्स शामिल हैं. वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जोनल रेलवे अब सामान मिलते समय, उसे ट्रेन में फिट करते समय व वर्कशॉप में रैंडम चेकिंग करेगा. रूटिन ओवरहॉल डिपो व एग्जामिनेशन यार्ड में भी चेकिंग का दायरा बढ़ाया जाएगा.
नियम टूटने पर भुगतना होगा भारी नुकसान
अगर किसी भी पुर्जे पर मार्किंग गायब, अधूरी, गलत या पढ़ने लायक नहीं मिली, तो रेलवे उस कंपनी का पूरा लॉट रिजेक्ट कर देगा. ऐसे मामलों में निर्माता या वेंडर को वॉरंटी नियमों के तहत पूरा सामान बदलना होगा. सबसे बड़ी बात ये है कि कई कैटेगरी में कंपनियों को रिजेक्ट किए गए पुर्जे मुफ्त में बदलने होंगे. इसके अलावा सामान को वापस ले जाने व नया सामान लाने का पूरा ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी कंपनी को ही उठाना होगा. क्वालिटी एश्योरेंस डायरेक्ट्रेट व थर्ड-पार्टी एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इंस्पेक्शन के दौरान इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाएं.
