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हमारा संघर्ष आपस में जुड़ा है… हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले बांग्लादेशी ग्रुप ने CJP के प्रदर्शनों का किया समर्थन

हमारा संघर्ष आपस में जुड़ा है… हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले बांग्लादेशी ग्रुप ने CJP के प्रदर्शनों का किया समर्थन

बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन का समर्थन किया है.ये वही NCP है जो बांग्लादेश की पू्र्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ तख्तापलट में शामिल थी. यही बांग्लादेशी समूह CJP के समर्थन में सामने आया है. इसी NCP के नेता भारत के ‘चिकन नेक’ इलाके को धमकी दे रहे हैं.

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को सत्ता से हटाने वाले छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाली NCP ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है. पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत के युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. उनकी लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई है.

NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने किया पोस्ट

NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के प्रति एकजुटता जताई है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब सीजेपी ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर जुटने का आह्वान किया है. इससे एक दिन पहले दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई हुई थी, जिसमें हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया.

‘भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के नाम…’

नाहिद इस्लाम ने अपनी पोस्ट में लिखा ‘भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के नाम, हम भारत के उन युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं जो चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं. नई दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों की हालिया हिरासत, साथ ही जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंद करने और पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाइयां सीधे तौर पर बुनियादी आज़ादी के लिए खतरा हैं. चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं के लिए पारदर्शी जवाब की ज़रूरत है, न कि बैरिकेड्स और सेंसरशिप की’.

‘यह संघर्ष सिर्फ़ आपका नहीं है…’

उन्होंने कहा ‘यह संघर्ष सिर्फ़ आपका नहीं है. ढाका से, हम आपके साथ एक दोस्त के तौर पर खड़े हैं. हम जवाबदेह सत्ता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवीय गरिमा की साझा मांग से जुड़े हैं’. उन्होंने कहा ‘हम इस संघर्ष को अच्छी तरह समझते हैं, क्योंकि हमने इसे खुद जिया है. जुलाई 2024 में, भर्ती कोटे के खिलाफ हमारे छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन ने 15 साल के तानाशाही शासन के खिलाफ देशव्यापी विद्रोह का रूप ले लिया. सरकार ने इसके जवाब में असली गोलियां चलाईं. बाद में संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया कि इस विद्रोह और उसे दबाने की कोशिशों के दौरान 1,400 लोग मारे गए. हमारे विद्रोह के दौरान भारतीय छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाज़ों द्वारा दिखाए गए समर्थन को हम गहराई से याद करते हैं और उसका सम्मान करते हैं’.

शाहीन बाग की महिलाओं का जिक्र

नाहिद इस्लाम ने कहा ‘हम भारत में लोकतांत्रिक विरोध की समृद्ध परंपराओं को मानते हैं. शाहीन बाग की महिलाओं ने दिल्ली की कड़ाके की ठंड में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की, वहीं JNU और जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्रों की कई पीढ़ियों ने संगठित विरोध को जारी रखा है. ये अमूल्य लोकतांत्रिक विरासतें हैं. आज, हम एक बार फिर सड़कों पर युवा भारतीय महिलाओं का साहस देख रहे हैं. बांग्लादेश में भी जुलाई क्रांति में महिलाएं सबसे आगे थीं. उनके साहस और बलिदान ने हमारी जीत सुनिश्चित करने में मदद की’.

NCP संयोजक ने कहा ‘ हिंदुत्ववादी बहुसंख्यकवाद, फासीवाद और किसी भी तरह की धार्मिक श्रेष्ठता को दक्षिण एशिया का भविष्य तय नहीं करना चाहिए. हम भारत में भी तानाशाही, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को उसी तरह खारिज करते हैं जैसे बांग्लादेश में करते हैं. हमारा साझा भविष्य धर्म, जाति, लिंग या वर्ग से परे, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए. कोई भी समाज तब तक सचमुच लोकतांत्रिक नहीं हो सकता जब तक अल्पसंख्यक डर में जी रहे हों, असहमति को अपराध माना जाए और नागरिकता पहचान पर निर्भर हो’.

भारत के अधिकारियों से अपील

उन्होंने कहा ‘हम भारत के अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करें, विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वालों को हिरासत में लेने के कारण और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी दें, अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के कारण हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करें, और यह सुनिश्चित करें कि पत्रकार बिना किसी डर या उपकरण ज़ब्त किए बिना रिपोर्टिंग कर सकें’

नाहिद इस्लाम ने कहा ‘आज कई युवा नेताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में लिया गया है. शरजील इमाम और उमर खालिद को बिना किसी मुकदमे के सालों से जेल में रखा गया है. हम भारत के सभी युवा प्रदर्शनकारियों और जमीर की आवाज उठाने वाले कैदियों को अपना साथी मानते हैं. उनका साहस पूरे दक्षिण एशिया के युवाओं को प्रेरित करता है’.

‘हमारे संघर्ष आपस में जुड़े हुए हैं…’

NCP ने कहा ‘हमारे संघर्ष आपस में जुड़े हुए हैं, जिनमें सीमा पर होने वाली हत्याओं, पानी के बंटवारे, पर्यावरण की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे अनसुलझे मुद्दे शामिल हैं. हम एक ऐसा दक्षिण एशिया चाहते हैं जहां देश एक-दूसरे को बराबरी का दर्जा दें, सरकारें जवाबदेह बनी रहें, और संप्रभुता का इस्तेमाल कभी भी दूसरों पर हावी होने के बहाने के तौर पर न किया जाए’.

आखिर में उन्होंने कहा ‘भारत के लोकतांत्रिक लोगों से ढाका से और हमारी जुलाई पीढ़ी की अधूरी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की ओर से, हम आपके साथ खड़े हैं. मजबूती से खड़े रहें, एक-दूसरे की रक्षा करें, सांप्रदायिक नफरत को नकारें, और दक्षिण एशिया के भविष्य को फासीवाद और बंटवारे के हवाले करने से इनकार करें. इंकलाब जिंदाबाद’.

दिल्ली में CJP का प्रदर्शन

दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों के प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े हैं. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. CJP के आयोजकों को शनिवार को पुलिस ने प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी, बावजूद इसके प्रदर्शन करने लोग आए जिन्हें हिरासत में ले लिया गया. CJP के आयोजकों ने रविवार, 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और सभा का आह्वान किया.

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