News

Commonwealth Special: कभी पानी पीकर सोईं, पिता की तेरहवीं की रात छोड़ा घर… अस्मिता डे का दर्द सुन भावुक हुए अमिताभ बच्चन

Commonwealth Special: कभी पानी पीकर सोईं, पिता की तेरहवीं की रात छोड़ा घर… अस्मिता डे का दर्द सुन भावुक हुए अमिताभ बच्चन

KBC 18: सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के मंच पर जब कोई ऐसा सितारा पहुंचता है जिसने अपने आंसुओं के साथ-साथ अपनी मुश्किलों को अपनी ताकत बनाकर तिरंगा लहराया हो, तो पूरा माहौल भावुक हो उठता है. हाल ही में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में देश को ऐतिहासिक गोल्ड मेडल दिलाने वाली अस्मिता डे जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठीं, तब उन्होंने अपनी जिंदगी के ऐसे दर्दनाक और प्रेरणादायक पन्ने खोले कि बिग बी समेत वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

त्रिपुरा के एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से निकलकर देश का गौरव बनने तक का अस्मिता का यह सफर किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है. अस्मिता ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए अमिताभ बच्चन को बताया कि उनके पिता गांव में साइकिल रिपेयर करने का काम करते थे. दिनभर में कभी 50 तो कभी 100 रुपये की कमाई होती थी. कई बार तो घर में खाने के लिए एक दाना भी नहीं होता था.

गरीबी, भूख और मिट्टी का वो कच्चा मकान

अस्मिता ने बताया, “मेरी मां पड़ोसियों से यह कहकर चावल मांगती थीं कि पति कमाकर लाएंगे तो सुबह लौटा दूंगी. जब रात को भूख लगती थी और पापा देर से आते, तो मम्मी बोलती थीं बेटा पानी पीकर सो जाओ. घर में बस एक वक्त का खाना (मिड-डे मील) मिल जाए, इसलिए मैं स्कूल जाती थी. कई बार तो हमने नमक-मिर्च या चावल के पानी (मांड) में नमक डालकर खाया है. हमारा घर मिट्टी का था, बारिश में मिट्टी बहती तो डर लगता था कि कहीं छत ही न गिर जाए. उसी कच्चे मकान में बैठकर मैंने सपना देखा था कि एक दिन अपने परिवार के लिए बहुत बड़ा पक्का घर बनाऊंगी.”

10-12 किमी दूर साइकिल से ट्रेनिंग और पहला गोल्ड

अस्मिता के इस सपने को पंख उनके पिता ने दिए. पिता रोज उन्हें 10 से 12 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग सेंटर ले जाते थे. जूडो शुरू करने के एक ही हफ्ते में अस्मिता ने डिस्ट्रिक्ट में गोल्ड जीता, फिर स्टेट में और जूनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. साल 2023 में जब उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी मिली, तब जाकर घर के आर्थिक हालात थोड़े सुधरे और वह अपनी डाइट और प्रोटीन का खर्च उठाने लगीं. साल 2025 में घुटने की गंभीर चोट के बाद भी पिता गांव से जड़ी-बूटी लेकर दिल्ली पहुंचे और अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया.

पिता की तेरहवीं की रात छोड़ा घर, देश के लिए जीती जंग

अस्मिता की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर तब आया जब कॉमनवेल्थ गेम्स से महज 6 महीने पहले उनके पिता का अचानक देहांत हो गया. अस्मिता पूरी तरह टूट चुकी थीं.उन्होंने कोच से रोते हुए कह दिया था कि अब वो नहीं खेलेंगी क्योंकि वो सब कुछ अपने पिता के लिए ही कर रही थीं और अब वही नहीं रहे. लेकिन मां और कोच की प्रेरणा ने उन्हें फिर खड़ा किया. मां ने कहा कि पिता ने कभी खेलने से नहीं रोका, तो आज वो क्यों रुकेंगी. पिता की तेरहवीं की पूजा खत्म होते ही अस्मिता उसी रात अपने आंसुओं को पीकर सीधे ट्रेनिंग कैंप के लिए रवाना हो गईं. 12 दिनों तक केवल फल खाकर वजन और ताकत गंवा चुकीं अस्मिता ने सिर्फ 15 दिनों की कड़ी मेहनत में ट्रायल पास किया, पहले नंबर पर आईं और फिर ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल देश की झोली में डाल दिया.

अस्मिता ने भावुक होकर से कहा, “मुझे बस इस बात का सबसे बड़ा मलाल रहेगा कि जब मैंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता, तो उस पल को देखने के लिए मेरे पापा इस दुनिया में नहीं थे.” उनकी इस अटूट निष्ठा और संघर्ष को सुनकर अमिताभ बच्चन ने उनके जज्बे को दिल से सलाम किया. उनकी कहानी सुनकर अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी का पूरा मंच भावुक नजर आया, बिग बी ने तो जैसे तैसे अपने आंसू रोक लिए, लेकिन वहां मौजूद दर्शक आंसू रोक नहीं पाए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *