बिहार: 8 महीने की जांच, 30 DNA टेस्ट… NEET छात्रा डेथ केस में किसी के खिलाफ सबूत नहीं, CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दी

बिहार के चर्चित NEET छात्रा मौत कांड में करीब आठ महीने की जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. दिल्ली से आई CBI टीम ने मंगलवार को पटना स्थित पॉक्सो की विशेष अदालत में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट यानी अंतिम प्रपत्र दाखिल कर दिया. जांच एजेंसी का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक ठोस साक्ष्य नहीं मिले. अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है. आखिर छात्रा की मौत की असली वजह क्या थी और उसके कपड़ों पर मिले स्पर्म किसके थे?
पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है. इस सुनवाई में पीड़ित परिवार का पक्ष भी सुना जाएगा. क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करना है या नहीं, अथवा आगे की जांच का रास्ता खोलना है, इस पर अंतिम निर्णय अदालत का होगा.
6 जनवरी को हॉस्टल में बेहोश मिली थी छात्रा
जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी. 6 जनवरी 2026 को वह हॉस्टल में बेहोश मिली थी. इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई.
छात्रा के पिता के फर्दबयान पर 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. परिजनों ने बेटी के शरीर पर चोट के निशान होने और उसके साथ यौन हिंसा की आशंका जताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे. मामले को लेकर पटना में लगातार विरोध-प्रदर्शन हुए और जांच पर भी सवाल उठते रहे.
मामले की शुरुआत में पुलिस की जांच को लेकर भी विवाद हुआ. पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद यौन हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल सामने आए. इसी क्रम में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म के साक्ष्य मिलने की बात जांच में सामने आई और DNA प्रोफाइलिंग शुरू की गई.
बिहार पुलिस की जांच के बाद सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने की अनुशंसा की. 12 फरवरी को CBI ने केस टेकओवर किया. एजेंसी ने हॉस्टल पहुंचकर जांच की, कमरे की पड़ताल की, दस्तावेज और कपड़े सहित कई सामान अपने कब्जे में लिए तथा हॉस्टल से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की.
30 लोगों के DNA टेस्ट, लेकिन नहीं मिला मैच
इस मामले की जांच में DNA टेस्ट को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा था. जांच के दौरान करीब 30 लोगों के DNA सैंपल लिए गए. इन नमूनों की तुलना छात्रा के कपड़ों से मिले जैविक साक्ष्य से की गई, लेकिन किसी का DNA मैच नहीं हुआ.
यानी जिस जैविक साक्ष्य को जांच का अहम सुराग माना जा रहा था, वह भी जांच एजेंसी को किसी आरोपी तक नहीं पहुंचा सका.
इसी बीच जांच के दौरान अस्पताल की एक नर्स से भी CBI ने लंबी पूछताछ की थी. रिपोर्टों के मुताबिक नर्स ने छात्रा के शरीर पर खरोंच के निशान देखे जाने की जानकारी जांच एजेंसी को दी थी.
जांच में अधिकारी बदलते रहे, लेकिन रहस्य नहीं खुला
मामले की जांच पहले चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी ने शुरू की थी. बाद में यौन हिंसा की आशंका सामने आने के बाद जांच अधिकारी बदले गए और SIT गठित की गई. इसके बाद मामला CBI को सौंपा गया.
CBI ने पहले पवन श्रीवास्तव को जांच की जिम्मेदारी दी थी, बाद में विभा कुमारी को जांच अधिकारी बनाया गया. मार्च में दिल्ली से CBI के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जांच की मॉनिटरिंग किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी.
हॉस्टल मालिक गिरफ्तार हुआ, लेकिन चार्जशीट नहीं
मामले में हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. लेकिन निर्धारित अवधि में बिहार पुलिस की SIT और बाद में CBI की ओर से भी उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जा सका. इसके बाद उसे नियमित जमानत मिल गई.
मां का बयान भी बना जांच का मुद्दा
इस मामले में छात्रा की मां का बयान दर्ज कराने को लेकर भी अदालत और CBI के बीच मामला सामने आया. विशेष पॉक्सो अदालत ने मां का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसे CBI ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है. यह याचिका अभी लंबित बताई गई है. परिवार की ओर से जांच एजेंसियों और डॉक्टरों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल—कपड़ों पर मिला स्पर्म किसका था?
- आठ महीने की जांच के बाद CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने मामले को खत्म करने के बजाय कई सवालों को और बड़ा कर दिया है.
- अगर जांच में किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला, तो छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म का स्रोत क्या था?
- अगर छात्रा के शरीर पर मिले चोट और खरोंच के निशान किसी घटना की ओर इशारा कर रहे थे, तो उन परिस्थितियों की अंतिम कड़ी तक जांच क्यों नहीं पहुंच सकी?
- और सबसे अहम—6 जनवरी को हॉस्टल में बेहोश मिली छात्रा की 11 जनवरी को मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई?
- इन सवालों का जवाब अब CBI की क्लोजर रिपोर्ट से ज्यादा अदालत की सुनवाई पर निर्भर है.
शिल्पी जैन/बॉबी कांड की याद फिर ताजा
बिहार में रहस्यमय मौत के ऐसे मामले पहले भी लंबे समय तक अनसुलझे रहे हैं. इसी वजह से इस NEET छात्रा मौत कांड की तुलना लोग पुराने शिल्पी जैन/बॉबी कांड से भी कर रहे हैं, जिसका रहस्य लंबे समय बाद भी पूरी तरह नहीं खुल सका.
