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क्या है Snicko टेक्नोलॉजी जिसे मिचेल स्टार्क ने बता दिया सबसे खराब, एक मैच में लगते हैं इतने करोड़

क्या है Snicko टेक्नोलॉजी जिसे मिचेल स्टार्क ने बता दिया सबसे खराब, एक मैच में लगते हैं इतने करोड़

एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट के दौरान इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी स्निको टेक्नोलॉजी से बेहद नाराज हैं. पहले दिन ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज एलेक्स कैरी को नॉट आउट देने के फैसले पर विवाद हुआ और एडिलेड टेस्ट के दूसरे दिन जेमी स्मिथ की बैटिंग में स्निको टेक्नोलॉजी पर सवाल उठाया गया. मिचेल स्टार्क ने तो इस तकनीक को बिल्कुल खराब बताकर इसे बाहर ही करने की वकालत कर दी है. आइए अब आपको बताते हैं कि आखिर स्निको टेक्नोलॉजी है क्या और इसे एक टेस्ट मैच में इस्तेमाल करने में कितना पैसा खर्च होता है?

स्निको टेक्नोलॉजी है क्या?

क्रिकेट में रीयल टाइम स्निकोमीटर का इस्तेमाल होता है जिसे स्निको के नाम से भी जाना जाता है. ये तकनीक डीआरएस (डिसिजन रिव्यू सिस्टम) के साथ इस्तेमाल होती है. स्निको तकनीक के जरिए गेंद और बल्ले के संपर्क को जांचा जाता है. इस तकनीक में अगर बल्ले और गेंद का संपर्क होता है तो एक वेव जेनरेट होती है. इस तकनीक को विकेट के पीछे कैच या एलबीडब्ल्यू के फैसलों में ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है.

क्या हर मैच में स्निको टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है?

रीयल टाइम स्निकोमीटर का इस्तेमाल हर मैच में नहीं किया जाता है. ये फॉर्मेट या स्तर पर निर्भर करता है. हालांकि वर्ल्ड कप, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, चैंपियंस ट्रॉफी, हाई प्रोफाइल बाइलेट्रल सीरीज में इसका इस्तेमाल किया जाता है. बड़ी क्रिकेट लीग जैसे आईपीएल, बीबीएल में भी इसका इस्तेमाल होता है.

बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया, ईसीबी, साउथ अफ्रीका के क्रिकेट बोर्ड आमतौर पर स्निको मीटर की जगह हॉक आई का इस्तेमाल करते हैं जो कि स्निको से ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है. हालांकि स्निको मीटर टेस्ट मैचों में ज्यादा इस्तेमाल होता है, वो भी ये ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में ज्यादा दिखाई देता है.

रीयल टाइम स्निकोमीटर के इस्तेमाल में कितना खर्च आता है?

रीयल टाइम स्निको मीटर पैकेज और मैच के टाइप पर इसकी कीमत तय होती है. स्निको मीटर का इस्तेमाल आमतौर पर डीआरएस के पैकेज में इस्तेमाल होता है जिसमें बॉल ट्रैकिंग, अल्ट्रा मोशन भी शामिल होता है.रिपोर्ट्स के मुताबिक टेस्ट मैच में इसकी कीमत 2 से 4 करोड़ रुपये तक होती है. सीरीज अगर बड़ी हो तो इसकी कीमत उस हिसाब से तय होती है. वर्ल्ड कप मैचों में इसमें 60 हजार से एक लाख डॉलर हर दिन तक खर्चा आता है.

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