भगवान के नाम पर शपथ ली तो मच गया बवाल, बीजेपी पार्षद की अब जेल से ओथ सेरेमनी

केरलम में ‘केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट’ (KAAPA) के तहत हिरासत में रखे जाने वाले बीजेपी पार्षद को बड़ी राहत मिली है. तिरुवनंतपुरम नगर निगम (Thiruvananthapuram corporation) के पार्षद आर. सुगाथन को हाई कोर्ट के आदेश के बाद आज मंगलवार को जेल के अंदर ही शपथ ग्रहण दिलाया जाएगा.
इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने कल सोमवार को विय्युर सेंट्रल जेल अधिकारियों को यह निर्देश दिया था कि अधिकारी मंगलवार सुबह 11 बजे जेल के अंदर ही बीजेपी पार्षद के शपथ ग्रहण की व्यवस्था करें. जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने सुगाथन की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुवनंतपुरम के मेयर वी.वी. राजेश और शपथ दिलाने के लिए जरूरी निगम अधिकारियों को जेल में जाने की अनुमति भी दे दी.
पहला शपथ ग्रहण हो गया था अमान्य
केरल में पार्षद सुगाथन समेत कुछ अन्य पार्षदों का शपथ ग्रहण विवादों में आ गया था क्योंकि इन लोगों ने शपथ ग्रहण के दौरान तय नियमों का पालन नहीं किया था. ‘केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट’ के अनुसार, नवनियुक्त पार्षदों को नियमों के अनुसार शपथ लेना होता है, जबकि इन लोगों ने नियमों का पालन नहीं किया और श्री नारायण गुरु तथा स्थानीय देवी-देवताओं के नाम पर शपथ ले लिया.
नियमों के उल्लंघन और शपथ ग्रहण को रद्द किए जाने को लेकर मामला हाई कोर्ट चला गया. केरल हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपने फैसले में सुगाथन और कुछ अन्य पार्षदों द्वारा ली गई शपथ को अमान्य करार दे दिया. कोर्ट के फैसले के बाद कई अन्य पार्षदों ने तो फिर से शपथ ले लिया लेकिन सुगाथन ऐसा नहीं कर सके क्योंकि उन्हें ‘केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट’ के तहत हिरासत में रखा गया था.
लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान होः HC
हाई कोर्ट ने कल सोमवार को अपने फैसले में कहा कि भले ही KAAPA के तहत एहतियाती हिरासत की वजह से बीजेपी पार्षद सुगाथन को रिहा नहीं किया जा सकता, लेकिन लोगों के लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए. तिरुवनंतपुरम के वाझोट्टुकोनम वार्ड से चुनी गईं सुगाथन को फिर से शपथ लेनी है, क्योंकि उनकी पिछली शपथ को अमान्य घोषित कर दिया गया था.
कोर्ट ने जेल अधिकारियों और तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन को जेल के अंदर ही शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने में मदद करने का निर्देश दिया. साथ ही हिरासत में बंद सुगाथन को 14 जुलाई को विय्युर सेंट्रल जेल से पद की शपथ लेने की इजाजत दे दी.
कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में सियासत गरमा गई. राजनीतिक दलों की ओर से कई तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस फैसले का स्वागत किया, जबकि विपक्षी दल LDF ने इसे राज्य की राजधानी की छवि पर एक दाग करार दिया. LDF संसदीय दल के नेता एसपी. दीपक ने कहा, “KAAPA के तहत हिरासत में बंद और कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे व्यक्ति को जेल से शपथ लेने की अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है.”
