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अयोध्या: जांच के दौरान सामने आईं 3 गाड़ियां, क्या राम मंदिर चंदा चोरी के पैसे से खरीदी गईं ये कारें?

अयोध्या: जांच के दौरान सामने आईं 3 गाड़ियां, क्या राम मंदिर चंदा चोरी के पैसे से खरीदी गईं ये कारें?

अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी मामले में पुलिस की जांच में तीन गाड़िया हैं. इस मामले में पुलिस ने अविनाश शुक्ला से आज 13 घन्टे की पूछताछ पूरी की. अविनाश को वापिस जेल भेजा गया. गुरुवार को अविनाश के रिश्तेदार के नाम की जो गाड़ी ब्रीजा पुलिस ने बरामद की, ये गाड़ी सेकेंड हैंड खरीदी गई थी. इस ब्रीजा गाड़ी को चोरी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया गया है इसलिए इस गाड़ी की जांच पुलिस कर रही है. ये गाड़ी चोरी के पैसे से खरीदी है. ये भी जांच का विषय है.

सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या पुलिस की टीम, आज अविनाश को 12 कोसी परिक्रमा मार्ग और कौशलपुरी योग सेंटर में लेकर गई थी. यहां आज अविनाश से कैश की कोई रिकवरी नहीं हुई. शनिवार को पुलिस की टीम गिरफ्तार आरोपियों में से किसी और आरोपी की पुलिस कस्टडी की मांग कर सकती है. इसके अलावा अनुकल्प की गाड़ियों की भी जांच अयोध्या पुलिस कर रही है. अनुकल्प ने हाल में एक सफेद रंग की डिजायर गाड़ी बुक करके डिलीवरी ली थी और उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली थी. सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प ने एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी बुक की थी चोरी के पैसों से इस गाड़ी को खरीदने से पहले अनुकल्प को गिरफ्तार कर लिया गया. सूत्रों के मुताबिक, ये डिजायर और स्कॉर्पियो गाड़ी चंदा चोरी के पैसों से ली गई थी.

अनिल मिश्रा और गोपाल राव से फिर हुई पूछताछ

वहीं SIT ने अनिल मिश्रा और गोपाल राव से फिर पूछताछ की और संपत्ति के दस्तावेज मांगे. पूछताछ के दौरान चंपत राय भी तीर्थ क्षेत्र में मौजूद रहे. गोपाल राव और अनिल मिश्रा ने कहा कि हमारी जानकारी में चोरी की बात देर से आई. अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT ने शुक्रवार को दूसरी बार ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव से लंबी पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक, इस बार पूछताछ का मुख्य फोकस इनकी व्यक्तिगत संपत्तियों और आय के स्रोत पर रहा.

SIT ने तीनों से उनकी चल-अचल संपत्तियों का पूरा विवरण मांगा है, साथ ही संबंधित संपत्ति के दस्तावेज भी प्रस्तुत करने को कहा है. जांच एजेंसी कथित तौर पर उन आरोपों की भी पड़ताल कर रही है जिनमें मंदिर निर्माण और जमीनों की खरीद-फरोख्त के दौरान कमीशनखोरी तथा कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात कही गई है.

SIT ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट का हो सकता है दोबारा परीक्षण

सूत्रों के अनुसार, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से विशेष रूप से इन आरोपों के संबंध में सवाल पूछे गए. SIT यह भी जांच रही है कि पिछले कुछ वर्षों में अनिल मिश्रा और गोपाल राव की संपत्तियों में कथित रूप से कितनी बढ़ोतरी हुई? अनिल मिश्रा से उनके नए आवास, आय के स्रोत और वित्तीय संसाधनों और लेन-देन के बारे में भी डिटेल जानकारी मांगी गई है. जांच के दौरान SIT ने ट्रस्ट से उसकी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, वित्तीय अभिलेख और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तलब किए हैं. सूत्रों के अनुसार, SIT ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट का दोबारा परीक्षण (री-ऑडिट) कराने की संभावना पर भी विचार कर रही है. उधर, SIT ने शुक्रवार को चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों तथा बैंक के कुछ अधिकारियों से भी पूछताछ की.

बैंक अधिकारियों से पूछा गया कि ट्रस्ट और बैंक के बीच हुई व्यवस्था का पूरी तरह पालन क्यों नहीं हुआ, निर्धारित प्रक्रिया में कथित बदलाव क्यों किए गए और यदि बैंक को किसी स्तर पर अनियमितता का संदेह था तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई? SIT ने यह भी सवाल किया कि जब निजी सुरक्षा एजेंसी को सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए लगाया गया था, तो उससे नकदी की गणना जैसे संवेदनशील कार्य क्यों कराए गए? SIT अपनी रिपोर्ट में बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी रिपोर्ट सौटेगी और संभव है उसके बाद इन बैंक कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो.

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