‘मैं इसके लिए टैक्स नहीं भरता!’ समय रैना के ‘India’s Got Latent’ शो के इस क्लिप पर क्यों मचा बवाल?

मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना का शो ‘India’s Got Latent’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार किसी भद्दे जोक या कॉमेडी की वजह से नहीं, बल्कि एक विदेशी छात्र के खुलासे और उस पर भड़के टैक्सपेयर्स के गुस्से की वजह से चर्चा में है. आइए जानते हैं कि शो में आए एक तंजानियाई छात्र ने ऐसा क्या कह दिया, जिससे भारत के करदाता भड़क उठे?
तंजानियाई छात्र का खुलासा और सोशल मीडिया पर छिड़ गई जंग
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नेहा पटेल नाम की एक X (पहले ट्विटर) यूजर ने समय रैना के शो का एक वीडियो क्लिप शेयर किया. शो में आए तंजानिया के एक छात्र ने बताया कि भारत में पढ़ाई के दौरान उसे भारत सरकार से छात्रवृत्ति (Scholarship) और हर महीने स्टाइपेंड मिलता है. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. जब उससे पूछा गया कि वह पैसे कैसे कमाता है, तो उसने कथित तौर पर कहा कि सरकार से मिलने वाले इसी वजीफे में से कुछ हिस्सा बचाकर वह तंजानिया में अपनी मां को भेज देता है. फिर क्या था, इसी बयान ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया.
भड़के टैक्सपेयर्स बोले- ‘और हमारे बच्चे सीटों के लिए तरस रहे हैं’
इस पोस्ट के सामने आते ही भारतीय करदाताओं का गुस्सा फूट पड़ा. नेहा पटेल और उनके समर्थन में आए लोगों ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि एक तरफ भारत के लाखों छात्र IITs, AIIMS और दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की एक-एक सीट और किताबों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो फिर भारतीय टैक्सपेयर्स का पैसा विदेशी छात्रों को क्यों दिया जा रहा है?
‘मेरी टैक्स की कमाई से तंजानिया क्यों भेज रहे पैसे?’
नेहा ने अपनी पोस्ट में साफ-साफ लिखा, मैं इनकम टैक्स इसलिए नहीं दे रही, ताकि मेरी मेहनत की कमाई तंजानिया भेज दी जाए. ये कोई शिक्षा कूटनीति नहीं है. ये हर टैक्स देने वाले भारतीय का अपमान है. उन्होंने इसे एक ऐसे परिवार से जोड़ा, जो अपने बच्चों को दो वक्त का खाना भी ठीक से नहीं दे पाता, लेकिन अच्छा बनने के लिए पड़ोसियों के बच्चों पर पैसा लुटाता है.
हालांकि, सोशल मीडिया पर इस बहस के दो पहलू देखने को मिले. जहां एक तरफ लोग इसका विरोध कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय नीतियों और छात्र विनिमय कार्यक्रमों (Student Exchange Programme) का बचाव भी किया.
कई यूजर्स ने साफ किया कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के तहत विदेशी छात्रों को भारत में रहने-खाने के लिए लगभग 20,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाता है, जो एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है. समर्थकों का तर्क है कि भारत को इन छात्रवृत्तियों के बदले अफ्रीकी और अन्य देशों में व्यापारिक और रणनीतिक लाभ मिलते हैं.
भारतीयों को भी मिलता है फायदा
लोगों ने यह भी याद दिलाया कि एरास्मस मुंडस (Erasmus Mundus) जैसी विदेशी छात्रवृत्तियों का सबसे बड़ा फायदा भारतीय छात्रों को ही मिलता है, जब वे अमेरिका, यूरोप या कोरिया में जाकर पढ़ाई करते हैं. इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है, हमें हमारे फेसबुक पेज पर कमेंट करके जरूर बताएं.
यहां देखिए वायरल वीडियो
Tanzanian student came on Samay Rainas Latent and said the Indian Govt gives him a scholarship/stipend for studying in India.
When asked how he earns money, he said he gets money from the Govt and sends some of it to his mother in Tanzania.
BRO WHAT THE FUCK?
Indian students pic.twitter.com/WhPThFIp9o
— Neha Patel (@Neha_S_Patel) August 11, 2026
