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राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के बारे में जानिए

राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के बारे में जानिए

राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद एक बार फिर देशकी सियासत गरमा गई है. चुनाव के लिए दाखिल शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. कांग्रेस इस फैसले पर भड़क गई और पार्टी इस फैसले को कोर्ट में ले जाने की तैयारी में है. इसी मसले पर पार्टी आज चुनाव आयोग से भी मुलाकात करेगी, हालांकि वह कल भी मुलाकात के लिए गई, लेकिन उसकी एंट्री नहीं हो सकी थी.

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस चुनाव आयोग पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया और आरोप लगाया कि यह अब वोट चोरी का मामला नहीं रहा, बल्कि सीट चोरी का मामला बन गया. अब उस चुनाव अधिकारी की चर्चा हो रही है कि जिसने कांग्रेस प्रत्याशी की दावेदारी खारिज कर एक बार फिर विवाद को हवा दे दी है.

फार्म-26 में जानकारी नहीं देने पर उम्मीदवारी खारिज

अरविंद शर्मा जो मध्य प्रदेश विधान सभा के प्रमुख सचिव हैं जिन्होंने बतौर रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) मीनाक्षा नटराजन की उम्मीदवारी खारिज कर दी. राज्यसभा चुनाव के चुनाव अधिकारी अरविंद ने जारी अपने आदेश में बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फार्म 26 में उक्त न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना अपूर्ण हलफनामा पेश किया था.

मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रत्याशी महेश केवट ने चुनाव अधिकारी के समक्ष यह शिकायत दर्ज कराई कि मीनाक्षी ने दाखिल हलफनामे में अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज केस का कोई जिक्र नहीं किया था. इस पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया.

हिमाचल प्रदेश से मास्टर्स की पढ़ाई

नामांकन खारिज करके चर्चा में आए अरविंद शर्मा हिंदी फिल्मों के खासे शौकीन हैं. उन्हें फिल्में देखने के अलावा उन्हें लॉन टेनिस और क्रिकेट देखना खासा पसंद है. दिल्ली में 5 जनवरी, 1965 को जन्मे अरविंद दिल्ली यूनिवर्सिटी के बीएससी करने के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के लोक प्रशासन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की.

उनके पास करीब 4 दशकों का संसदीय और विधायी क्षेत्र में काम करने का अनुभव है. अप्रैल 1989 में उन्होंने दिल्ली स्थित संसद के लोकसभा सचिवालय में शासकीय सेवा की शुरुआत की. लोकसभा ग्रुप ‘ए’ सर्विस में रहते हुए उन्होंने अवर सचिव, उप सचिव, अतिरिक्त निदेशक, और निदेशक तथा संयुक्त सचिव के रूप में 26 साल गुजारे. वह प्रतिनियुक्ति पर मार्च 2024 में मध्य प्रदेश विधानसभा आ गए.

फिलहाल वह एक अक्टूबर, 2025 से वह प्रमुख सचिव के रूप में पदस्थ हैं. कुल मिलाकर उनके पास 37 सालों का अनुभव है. उन्होंने सम्मेलन और शिष्टाचार विभाग के तहत कई अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया. इसमें
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ और नई दिल्ली में आयोजित अंतर-संसदीय संघ सम्मेलन शामिल है. अक्टूबर 2023 में दिल्ली में आयोजित पी-20 अध्यक्षीय सम्मेलन में भी अहम भूमिका निभाई थी.

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