400 साल पुराना रहस्यमयी कुआं, यहां एक डुबकी लगाते ही दूर हो जाते हैं रोग… इतिहास भी है बेहद अनोखा

Telangana News: तेलंगाना के संगारेड्डी जिले अंतर्गत सदाशिवपेट के राघवेंद्रनगर में स्थित एक प्राचीन सीढ़ीदार कुआं (बावड़ी) आज भी इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. स्थानीय लोग इसे ‘पुष्करिणी’ मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजते हैं. लगभग 400 वर्ष पूर्व निर्मित यह भव्य संरचना आज भी पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें निरंतर जल भरा रहता है, जो हमारे पूर्वजों के बेजोड़ इंजीनियरिंग कौशल और दूरदर्शिता को दर्शाता है.
यह ऐतिहासिक कुआं केवल पेयजल का स्रोत नहीं, बल्कि अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है. स्थानीय निवासियों की दृढ़ आस्था है कि इस पुष्करिणी का जल पीने और इसमें स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं तथा जीवन में शुभता का आगमन होता है. इस तेजस्वी पुष्करिणी का संबंध समीप स्थित प्रसिद्ध श्री जानकी रघुनाथस्वामी मंदिर से है.
जनकम्मा और रघुनाथ महाराज की पावन गाथा
स्थानीय कथाओं के अनुसार, अतीत में मातृश्री जनकम्मा और रघुनाथ महाराज सदाशिवपेट से करीब 3 किलोमीटर दूर एनीकेपल्ली गांव के पास होम-यज्ञ किया करते थे. कार्तिक बहुला एकादशी के दिन जब भगवान रघुनाथ स्वामी का देहांत हुआ, तब उनकी पत्नी जनकम्मा ने चिता में प्रवेश कर सहगमन किया. मान्यता है कि जहां चिता जलाई गई थी, वहां भस्म के स्थान पर केवल फूल शेष रहे. इन्हीं फूलों के स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया और तब से लोग उन्हें देवता मानकर पूजते हैं.
करोड़पति के सपने और रोगमुक्ति से जुड़ा इतिहास
इस पुष्करिणी के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प इतिहास जुड़ा है. प्राचीन समय में कुष्ठ रोग से पीड़ित एक धनवान व्यक्ति इस क्षेत्र में आए और अंजीर के पेड़ के नीचे विश्राम करने लगे. रात में भगवान रघुनाथ स्वामी ने उनके स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि पास के छोटे से तालाब में स्नान करने से उनका रोग ठीक हो जाएगा. करोड़पति ने पूर्ण विश्वास के साथ स्नान किया और वे पूरी तरह रोगमुक्त हो गए. इसके आभार स्वरूप उन्होंने इस विशाल और सुंदर पुष्करिणी का निर्माण करवाया. यह मंदिर सदाशिवपेट शहर के बसने से भी पुराना बताया जाता है, जहां योगी जानकी रघुनाथ स्वामी ने तपस्या की थी.
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400वीं वर्षगांठ पर भव्य समारोह का आयोजन
हाल ही में इस ऐतिहासिक पुष्करिणी की 400वीं वर्षगांठ बड़े धूमधाम से मनाई गई. श्री बाल मार्तण्ड सर्वे मुखियाजी महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत पुष्करिणी तीर्थ में प्रात: स्नान से हुई, जिसके बाद महाभिषेकम, रुद्राभिषेकम और विशाल अन्नप्रसादम का आयोजन हुआ.
यहां हर साल कार्तिक माह में विशेष उत्सव, श्रावण माह में रुद्राभिषेकम तथा 41 दिनों का पारंपरिक मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें हैदराबाद के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बावड़ी उनके गाँव की गौरवशाली पहचान है और इसकी तथा आसपास की प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है.
