भारतीय मूल के महेंद्र ने अमेरिका में बैंक को लगाया 955 करोड़ का चूना, हो सकती है 30 साल की सजा

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के महेंद्र माखीजानी को करीब 10 करोड़ डॉलर (लगभग 955 करोड़ रुपये) की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. 44 साल के माखीजानी कैलिफोर्निया के कोरोना डेल मार में रहते हैं और उनके पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड है. अगर अदालत में उनके खिलाफ लगे आरोप साबित हो जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 30 साल तक जेल की सजा हो सकती है. न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, माखीजानी पर सेक्स पार्टियां होस्ट करने और वहां आने वाले लोगों पर दबाव डालने का भी आरोप है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, माखीजानी पर एक बैंक को लगभग 10 करोड़ डॉलर का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. माखीजानी को शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया. जांच एजेंसियों का आरोप है कि माखीजानी ने टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया. उन्होंने संपत्तियों पर पहले से मौजूद कर्ज और दावों की सही जानकारी छिपाई और कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल करके बैंक को गुमराह किया. अधिकारियों के मुताबिक, इस तरीके से बैंक से लगभग 10 करोड़ डॉलर हासिल किए गए.
Feds bust Indian-born financier accused of defrauding $100M at his luxurious Newport Beach mansion https://t.co/1Y0wH5deJf pic.twitter.com/wBSbj7r7Wk
— California Post (@californiapost) June 10, 2026
क्या है पूरा मामला?
पैसों के लेन-देन, कई खातों और अलग-अलग कंपनियों के जरिए किए गए ट्रांसफर की जांच जांच में पूरे घोटाले का खुलासा हुआ. अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, माखीजानी कैंटर ग्रुप V LLC नाम की कंपनी को नियंत्रित करते हैं. यह कंपनी कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट बीच में स्थित है और उसका एक बैंक के साथ लोन एग्रीमेंट था. इस समझौते के तहत बैंक ने कंपनी को लगभग 10 करोड़ डॉलर दिए थे, ताकि वह रियल एस्टेट लोन जारी कर सके या ऐसे लोन खरीद सके. बदले में कंपनी को लोन और उनसे जुड़ी संपत्तियों को बैंक के पास सुरक्षा के तौर पर गिरवी रखना था और लोन से मिलने वाली रकम से बैंक का पैसा लौटाना था.
बैंक के सवालों के गलत जवाब दिए
जांच में आरोप लगाया गया है कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच माखीजानी ने टाइटल इंश्योरेंस पॉलिसियों में फर्जी बदलाव किए. इन दस्तावेजों में यह दिखाया गया कि कुछ संपत्तियों पर सबसे पहला कानूनी दावा उनकी कंपनी का है, जबकि असल स्थिति अलग थी.
अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बाद माखीजानी ने अपने एक कर्मचारी से ये कागजात बैंक को भेजवाए. उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ कई ऑनलाइन बैठकों और टेलीकॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया और बैंक के सवालों की गलत जानकारी दी. अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह पूरी योजना बैंक को धोखा देकर बड़ी रकम हासिल करने के लिए बनाई गई थी. मामले की जांच जारी है.
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