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AI का खौफनाक रूप! साइबर ठगों ने 2 महीने में NBFCs के उड़ाए ₹300 करोड़

AI का खौफनाक रूप! साइबर ठगों ने 2 महीने में NBFCs के उड़ाए ₹300 करोड़

भारत में साइबर अपराधियों ने वित्तीय कंपनियों को निशाना बनाकर एक बड़े वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब दो महीनों में देश की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) से लगभग 300 करोड़ रुपए की रकम कथित तौर पर निकाल ली गई. इस मामले में करीब 150 शिकायतें या FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. इन हमलों में खास तौर पर छोटी NBFC कंपनियों को निशाना बनाया गया, जिनकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर थी. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में चीनी हैकिंग प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूलकिट की भूमिका सामने आई है. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब फाइनेंस कंपनियां तेजी से डिजिटल हो रही हैं, तो क्या उनकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था भी उसी रफ्तार से मजबूत हो रही है?

क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ 300 करोड़ रुपए का नुकसान?

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले करीब दो महीनों में देश की कई छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर साइबर हमले हुए. इन हमलों में कंपनियों की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़ी रकम निकालने की घटनाएं सामने आईं.

दिल्ली में एक NBFC पर दो बार हमला होने की जानकारी दी गई है. पहले हमले में कंपनी को करीब 7.5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि कुछ दिनों बाद हुए दूसरे हमले में लगभग 7.25 करोड़ रुपए की रकम निकल गई. यानी एक ही कंपनी को दो अलग-अलग हमलों में करीब 14.75 करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात सामने आई है.

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन हमलों का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा, जिनका कारोबार अपेक्षाकृत छोटा था और जिनकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त मजबूत नहीं थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि कई मामलों की जांच अभी जारी है. इसलिए सभी घटनाओं के पीछे इस्तेमाल किए गए तरीकों और जिम्मेदार लोगों की पहचान को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता.

चीनी हैकिंग प्लेटफॉर्म का हाथ

साइबर सुरक्षा एजेंसियां ​​इस स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं और NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) को सलाह दे रही हैं कि वे जल्द से जल्द अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करें. जिन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, उनमें एजेंसियों ने पाया है कि इसके पीछे ‘साइबरस्ट्राइक’ (CyberStrike) नाम का एक चीनी हैकिंग प्लेटफॉर्म है. अन्य मामलों की जांच अभी भी जारी है. एक्सपर्ट ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि दो चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूलकिट – ‘आर्टेक्स’ (Artex) और ‘साइबरस्ट्राइक’ (CyberStrike) – के साथ-साथ ‘डीपसीक’ (DeepSeek), अलीबाबा का ‘क्वेन’ (Qwen), मूनशॉट का ‘किमी’ (Kimi) और झिपु (Zhipu) का ‘GLM’ जैसे चीनी ओपन-सोर्स मॉडल, भारत और दुनिया भर के वित्तीय सिस्टम को निशाना बना रहे हैं. जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां भी इन हमलों का सामना कर रही हैं.

इस तरह से हो रहे हैं हमले

जांच की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि कुछ छोटी NBFCs को यह नहीं पता होता कि उनके पास कैसा इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए या ऑडिट कब कराया जाना चाहिए. साथ ही, उनके सिस्टम भी बहुत कमजोर होते हैं. 15 अक्टूबर तक बैंकिंग रेगुलेटर के पास कुल 8,502 NBFCs रजिस्टर्ड थीं. सूत्रों के अनुसार, मुंबई में लगभग 30, दिल्ली में 25 से ज्यादा, और चेन्नई तथा अन्य शहरों में 15-16 शिकायतें दर्ज की गई हैं. साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतें या FIR अक्सर संवेदनशील मामले होने के कारण गोपनीय रखी जाती हैं.

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जालसाज सबसे पहले 10-12 दिनों तक किसी NBFC के कामकाज को ऐनालाइज करते हैं. वे यह देखते हैं कि वहां पेमेंट कैसे किए जाते हैं, संस्था की ‘व्हाइटलिस्टेड’ ID कौन सी हैं, और उनके सिस्टम के कोड में क्या कमियां हैं—इसके बाद ही वे हमला करते हैं. हालांकि हैकिंग के ये तरीके तकनीकी रूप से बहुत एडवांस नहीं है. लेकिन AI मॉडल और टूलकिट की मदद से अब इन तक पहुंचना काफी आसान हो गया है. मामले पर नजर रखने वाले एक अधिकारी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि आपको बस AI मॉडल में टूलकिट डालनी है और एक ‘प्रॉम्प्ट’ देना है. इसके बाद वह टूल आपके लिए हैकिंग कर देगा. उन्होंने बताया कि इससे उन NBFCs में ‘जामताड़ा-स्टाइल’ सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों के लिए रास्ता तैयार हो जाता है, जो सुरक्षा के लिहाज से कमजोर हैं.

दक्षिण कोरिया में भी हुए साइबर हमले

साइबर इंटेलिजेंस फर्म ‘साइबल’ (Cyble) ने पाया कि दक्षिण कोरिया में हाल ही में हुए एक हमले में, एक लोन इंक्वायरी सर्विस को निशाना बनाया गया था. डेटा चुराने के बाद, हमलावर ने AI से पूछा कि इसे कहां बेचा जा सकता है और कौन से टेलीग्राम ग्रुप इस तरह की जानकारी का लेन-देन करते हैं. साइबल के कार्यकारी उपाध्यक्ष मंदार पाटिल ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि अगर कोई कॉलर आपका नाम, लोन देने वाली संस्था और लोन की रकम जानता है, तो वह भरोसेमंद लग सकता है. एक LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल) धाराप्रवाह हिंदी या तमिल में ऐसी कॉल की स्क्रिप्ट तैयार कर सकता है. पाटिल ने आगे कहा कि जिन भारतीय कंपनियों पर हमला हुआ है, उन्हें अपने ग्राहकों को पहले ही चेतावनी भेज देनी चाहिए, ताकि वे फिशिंग कॉल से बच सकें.

एसबीआई ने जारी की एडवाइजरी

शुक्रवार को, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने उन ग्राहकों को सलाह (एडवाइजरी) भेजी, जो हाल ही में हुए डेटा लीक से प्रभावित हुए थे. इस लीक के कारण डार्क वेब पर 3,75,000 रिकॉर्ड वाला एक डेटासेट सामने आ गया था. भारत की नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी ‘CERT-In’ ने बताया कि इन फ्रेमवर्क्स की वजह से, सिस्टम में सेंध लगने से लेकर नुकसान होने तक का समय अब ​​दिनों से घटकर कुछ घंटों का रह गया है, क्योंकि इसमें कई AI एजेंट एक साथ काम करते हैं. जिन संगठनों ने अपनी कमियों को पूरी तरह से ठीक (पैच) नहीं किया, उन पर कुछ ही दिनों के भीतर और भी बड़े पैमाने पर दोबारा हमले हुए. CERT-In ने संगठनों से कहा है कि वे अपनी ‘रेड टीमों’ को सतर्क करें और ARTEX तथा CyberStrike से जुड़े अलर्ट्स को प्राथमिकता दें.

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