BRICS सम्मेलन क्या है? जानिए BRICS का इतिहास, सदस्य देश, उद्देश्य और भारत के लिए महत्व
आज के समय में दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS एक महत्वपूर्ण समूह बन चुका है। BRICS में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं, जो आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साथ काम करते हैं।
BRICS सम्मेलन इसी समूह के सदस्य देशों के नेताओं की वार्षिक उच्च-स्तरीय बैठक होती है, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्त, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
वर्ष 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है।
BRICS क्या है?
BRICS एक अंतर-सरकारी समूह है, जिसमें दुनिया की कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। BRICS का नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है।
शुरुआत में इसमें चार देश शामिल थे:
- B – Brazil (ब्राजील)
- R – Russia (रूस)
- I – India (भारत)
- C – China (चीन)
इसी वजह से इसे पहले BRIC कहा जाता था। वर्ष 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसमें S – South Africa जुड़ा और समूह का नाम BRICS हो गया।
बाद में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात तथा इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें शामिल हुए।
BRICS सम्मेलन क्या होता है?
BRICS सम्मेलन सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक होती है। इसमें सदस्य देश आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार करते हैं और भविष्य की प्राथमिकताएं तय करते हैं।
सम्मेलन में सामान्यतः इन विषयों पर चर्चा हो सकती है:
- आर्थिक सहयोग
- व्यापार और निवेश
- ऊर्जा सुरक्षा
- खाद्य सुरक्षा
- तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था
- जलवायु परिवर्तन
- स्वास्थ्य
- वैश्विक वित्तीय व्यवस्था
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार
- अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दे
BRICS के तहत सहयोग को राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे व्यापक क्षेत्रों में आगे बढ़ाया जाता है।
BRICS की शुरुआत कब हुई?
BRICS की अवधारणा का उल्लेख सबसे पहले वर्ष 2001 में किया गया था। अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने BRIC शब्द का इस्तेमाल ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में किया था।
इसके बाद इन देशों के बीच आधिकारिक सहयोग बढ़ा और वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
वर्ष 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया।
BRICS के सदस्य देश कौन-कौन से हैं?
वर्तमान BRICS सदस्य देशों की सूची में 11 देश शामिल हैं:
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- संयुक्त अरब अमीरात
- सऊदी अरब
- इंडोनेशिया
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार इंडोनेशिया जनवरी 2025 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना। इसके अलावा कई देशों को BRICS पार्टनर देश का दर्जा भी दिया गया है।
2026 का BRICS सम्मेलन भारत में क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली और यह भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता है।
18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय है:
“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए मिलकर काम करना। भारत ने इसके साथ “Humanity First” यानी मानवता को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण पर भी जोर दिया है।
2026 BRICS सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?
नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में आर्थिक और वैश्विक मुद्दों के साथ कई महत्वपूर्ण विषय चर्चा के केंद्र में हैं।
1. आर्थिक सहयोग
BRICS देश आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करते हैं। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है।
2. वैश्विक वित्तीय व्यवस्था
BRICS लंबे समय से वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार की बात करता रहा है।
3. व्यापार और निवेश
सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और निवेश के अवसर बढ़ाना BRICS सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मुद्दे भी BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इन विषयों का महत्व और बढ़ गया है।
5. तकनीक और नवाचार
डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में सहयोग भी BRICS एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
6. वैश्विक शांति और सुरक्षा
यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और अन्य अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में BRICS देशों के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श भी महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के लिए BRICS कई कारणों से महत्वपूर्ण है। यह भारत को प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का मंच प्रदान करता है।
BRICS के माध्यम से भारत:
- विकासशील देशों की आवाज को मजबूत कर सकता है।
- वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में सुधार की मांग उठा सकता है।
- व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ा सकता है।
- ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग कर सकता है।
- डिजिटल और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ा सकता है।
- वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता दे सकता है।
भारत की विदेश नीति में BRICS का महत्व इसलिए भी बढ़ता है क्योंकि इसमें चीन और रूस जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं, जबकि भारत के अमेरिका और यूरोप के साथ भी महत्वपूर्ण संबंध हैं।
BRICS और New Development Bank
BRICS की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में New Development Bank (NDB) भी शामिल है। इसका उद्देश्य सदस्य और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे तथा सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।
यह BRICS देशों के बीच वित्तीय सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है।
क्या BRICS एक सैन्य संगठन है?
नहीं। BRICS को NATO जैसे सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाता। इसका मुख्य जोर आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक, सामाजिक और विकास संबंधी सहयोग पर है।
हालांकि, सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं, इसलिए BRICS का भू-राजनीतिक महत्व लगातार बढ़ा है।
BRICS का वैश्विक महत्व
BRICS की बढ़ती सदस्यता के साथ इसका वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार BRICS के 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की लगभग 49.5% आबादी, करीब 40% वैश्विक GDP और लगभग 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसी वजह से BRICS को वैश्विक दक्षिण की एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में देखा जाता है।
निष्कर्ष
BRICS सम्मेलन दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी और समय के साथ इसका विस्तार होकर यह 11 सदस्य देशों वाला समूह बन गया है।
वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता और नई दिल्ली में आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। सम्मेलन में आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
BRICS आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में किस तरह की भूमिका निभाएगा, यह इसकी बढ़ती सदस्यता और सदस्य देशों के बीच सहयोग की क्षमता पर निर्भर करेगा।
