Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी पर क्यों रखा जाता है संतान के लिए व्रत? पद्म पुराण में छिपा है सच

Sawan Putrada Ekadashi 2026: हिंदूं धर्म में एकादशी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी अपने आप में बेहद फलदायी और खास मानी जाती है. इसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपति भी इस व्रत को श्रद्धा के साथ रखते हैं. साल 2026 में सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा. आइए जानते हैं कि धार्मिक ग्रंथ पद्म पुराण में इस व्रत को लेकर क्या कथा बताई गई है और संतान की खुशहाली से इसका क्या संबंध है.
पुत्रदा एकादशी को संतान सुख से क्यों जोड़ा जाता है?
पुत्रदा एकादशी के नाम में ही इसका महत्व छिपा है. धार्मिक मान्यता में पुत्रदा का मतलब संतान प्रदान करने वाली एकादशी से जोड़ा जाता है. हालांकि, इसे केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं माना जाना जाता. इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान के लिए शुभ फल की कामना पूरी होती है.
पद्म पुराण में मिलती है राजा महाजीत की कथा
पुत्रदा एकादशी से जुड़ी सबसे चर्चित कथा पद्म पुराण में बताई गई है. कथा के अनुसार, द्वापर युग में महिष्मति नगरी के राजा महाजीत बेहद दयालु और धार्मिक थे. उनके राज्य में प्रजा सुखी थी और राजा के पास किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं था. संतान न होने की वजह से राजा और रानी काफी दुखी रहते थे. धीरे-धीरे यह चिंता उनकी प्रजा को भी परेशान करने लगी. तब राजा के मंत्रियों और प्रजा ने इस समस्या का समाधान जानने के लिए ऋषियों से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया.
लोमेश ऋषि ने बताया पिछले जन्म का रहस्य
राजा की परेशानी दूर करने के लिए प्रजा और मंत्री लोमेश ऋषि के पास पहुंचे. ऋषि ने राजा की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले जन्म में उनसे जाने-अनजाने कुछ ऐसा कर्म हुआ था, जिसका प्रभाव उन्हें इस जन्म में संतानहीनता के रूप में भुगतना पड़ रहा है. इसके बाद लोमेश ऋषि ने राजा को पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. ऋषि ने बताया कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करने से राजा की मनोकामना पूरी हो सकती है.
राजा-रानी ने रखा एकादशी का व्रत
लोमेश ऋषि की सलाह मानकर राजा महाजीत और उनकी रानी ने श्रद्धा के साथ पुत्रदा एकादशी का व्रत किया. उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और पूरे विधि-विधान से एकादशी का पालन किया. धार्मिक कथा के अनुसार, व्रत के प्रभाव से राजा-रानी को एक प्रतापी और संस्कारी पुत्र की प्राप्ति हुई. इसी कथा के कारण पुत्रदा एकादशी को संतान सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है.
पुत्रदा एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है. फिर पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तुति का पाठ किया जा सकता है. व्रत के दौरान सात्विकता और संयम का पालन करने की खास परंपरा है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.
