Vadilal परिवार में फिर छिड़ी जंग! आइसक्रीम कारोबार को लेकर मामला पहुंचा हाईकोर्ट

देश की मशहूर आइसक्रीम कंपनी वाडीलाल (Vadilal) के परिवार की मुंबई और अहमदाबाद शाखाओं के बीच विवाद एक बार फिर अदालत पहुंच गया है. मुंबई समूह की कंपनी वाडीलाल डेयरी इंटरनेशनल (VDIL) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अहमदाबाद शाखा पर उसके कारोबार में दखल देने का आरोप लगाया है.
मुंबई शाखा ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम (Arbitration and Conciliation Act) की धारा 9 के तहत दायर याचिका में अदालत से अंतरिम राहत की मांग की है. कंपनी ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि अहमदाबाद शाखा, वाडीलाल इंडस्ट्रीज और उनसे जुड़े अन्य पक्षों को वाडीलाल ब्रांड के तहत आइसक्रीम और जूस के निर्माण, बिक्री, वितरण और मार्केटिंग में किसी भी तरह की रुकावट डालने से रोका जाए.इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस अमित बोरकर ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
मुंबई शाखा ने क्या लगाए आरोप?
मुंबई शाखा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुस्तफा डॉक्टर ने अदालत में कहा कि अहमदाबाद शाखा पहले मुंबई समूह का कारोबार खरीदना चाहती थी, लेकिन बाद में उसने सौदा पूरा नहीं किया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई कानूनी विवाद शुरू हो गए.
मुंबई शाखा का दावा है कि 1993 के पारिवारिक समझौते के तहत उसे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाडीलाल ब्रांड के तहत आइसक्रीम और जूस बेचने का स्थायी और अपरिवर्तनीय अधिकार मिला था. इसके बदले उसने समूह की ट्रेडमार्क होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी थी.
मुंबई समूह ने यह भी आरोप लगाया कि अहमदाबाद शाखा ने उसके कारोबार को नुकसान पहुंचाने के लिए अमेरिका में ट्रेडमार्क से जुड़े मुकदमे, उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल, प्रोडक्ट रिकॉल की मांग और फैक्टरी निरीक्षण जैसे कदम उठाए.
अहमदाबाद शाखा ने क्या कहा?
अहमदाबाद शाखा की ओर से वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत में कहा कि VDIL द्वारा बनाए गए उत्पादों में बार-बार गंभीर माइक्रोबायोलॉजिकल (सूक्ष्मजीव) संक्रमण पाया गया है. उनका दावा है कि इससे कंपनी ने 1992 के रजिस्टर्ड यूजर एग्रीमेंट में तय गुणवत्ता नियंत्रण की शर्तों का उल्लंघन किया है.
वहीं वाडीलाल इंटरनेशनल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शिराज रुस्तमजी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के अनुसार ऐसे विवादों का अधिकार क्षेत्र अहमदाबाद की जिला अदालत है.
वाडीलाल इंडस्ट्रीज ने भी रखा पक्ष
वाडीलाल इंडस्ट्रीज की ओर से वरिष्ठ वकील जाल अंध्यारुजिना ने कहा कि कंपनी एक सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनी है और उसके 35% शेयर आम निवेशकों के पास हैं. उन्होंने दलील दी कि कंपनी पारिवारिक समझौते का हिस्सा नहीं थी, इसलिए उसे इस मामले में पक्षकार बनाना उचित नहीं है.
अब मुंबई शाखा ने 1993 के पारिवारिक समझौते के तहत मध्यस्थता (Arbitration) की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अंतिम फैसला आने तक अदालत से अंतरिम राहत की मांग की है.